रांची , जुलाई 20 -- देश में स्टील उत्पादन के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में टाटा स्टील बड़े स्तर पर निवेश करने जा रही है।
टाटा स्टील के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन प्रमुख सर्वेश कुमार ने सोमवार को यहां कहा कि कंपनी भारत में हिसारना तकनीक स्टील प्लांट में स्थापित करेगी। इस तकनीक से स्टील उत्पादन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आयेगी। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2035 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करना है। उन्होंने कहा कि टाटा स्टील कंपनी कार्बन उत्सर्जन हटाने की दिशा में कार्य कर रही है।
श्री कुमार ने कहा कि वर्ष 2030 तक भारत में कार्बन उत्सर्जन में 15 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।नीदरलैंड में कंपनी कार्बन उत्सर्जन में 45 प्रतिशत तक कमी लाने की दिशा में काम कर रही है। वहीं यूनाइटेड किंगडम में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस आधारित स्टील उत्पादन शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसी क्रम में पंजाब के लुधियाना में 100 प्रतिशत स्क्रैप आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है।
उन्होंने बताया कि टाटा स्टील की देश और विदेश में पांच प्रमुख उत्पादन इकाइयां हैं। भारत में ओडिशा और जमशेदपुर संयंत्रों से वर्तमान में 25 मिलियन टन स्टील का उत्पादन हो रहा है।कंपनी इसे बढ़ाकर 40 मिलियन टन तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है।
श्री कुमार ने कहा कि कंपनी डाउनस्ट्रीम उद्योगों में भी लगातार निवेश बढ़ा रही है। कांबी मिल की स्थापना पर करीब 1500 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे। इसके अलावा सारंडा परियोजना में 1500 करोड़ रुपये तथा टाटा टिनप्लेट में 2600 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए उच्च गुणवत्ता वाले स्टील का उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है, जिससे वाहनों का वजन और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि स्टील उद्योग के सामने कार्बन उत्सर्जन सबसे बड़ी चुनौती है। वर्तमान में एक टन स्टील उत्पादन पर औसतन 2.5 टन कार्बन का उत्सर्जन होता है।हिसारना तकनीक के जरिये इसे घटाकर 0.3 से 0.4 टन तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।कंपनी पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस, कार्बन उत्सर्जन कम करने वाली नई तकनीकों और इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस, तीनों पर समानांतर रूप से काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारत का कुल स्टील उत्पादन करीब 150 मिलियन टन है, जबकि चीन में यह 800 मिलियन टन से अधिक है।
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए टाटा स्टील स्क्रैप आधारित स्टील उत्पादन को भी तेजी से बढ़ा रही है।
इस अवसर पर झारखंड के चीफ रेजिडेंट एग्जीक्यूटिव अरविंद कुमार सिन्हा, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन के राजेश सिन्हा, अमृतांशु, निभा शर्मा, अपूर्व शुक्ला सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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