मुंबई , अक्टूबर 29 -- महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत ने टाइगर श्रॉफ गोलीबारी मामले के सभी 11 आरोपियों को गुरुवार को सात नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।
मकोका के प्रावधान लागू होने के बाद आरोपियों को पहली बार विशेष अदालत के सामने पेश किया गया। पुलिस ने उनसे और पूछताछ करने के लिए 10 दिन की पुलिस हिरासत की मांग की। पुलिस ने तर्क दिया कि कथित साजिश का पर्दाफाश करने, आरोपियों की भूमिका तय करने और विदेशी हथियारों के मिलने के स्रोत की जांच करने के लिए हिरासत जरूरी है।
हिरासत अर्जी पेश करते हुए पुलिस ने कहा कि अपराध होने के बाद उसकी जिम्मेदारी लेना एक गंभीर मामला है, क्योंकि ऐसी हरकतें समाज में डर और दहशत का माहौल पैदा कर सकती हैं।
जांच एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि आरोपी 'सिग्नल' नामक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे, जिससे जांच में मुश्किलें आ रही हैं।
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि आरोपियों के बीच हुई बातचीत की प्रकृति का पता लगाने और इस मामले में उनकी संलिप्तता की हद तय करने के लिए पुलिस को उस ऐप के जरिए हुए संवाद को डिकोड करने की जरूरत है।
पुलिस ने अनिल पंडित को इस गिरोह का कथित सरगना बताया और कहा कि यह पता लगाने के लिए उससे और पूछताछ जरूरी है कि उसने बाकी आरोपियों को कैसे इकट्ठा किया, उनके लिए पैसें का इंतजाम कैसे किया और विदेशी हथियार कैसे हासिल किए।
पुलिस की इस मांग का विरोध करते हुए बचाव पक्ष के वकील अजिंक्य मिरगल ने दलील दी कि आरोपियों से पहले ही कई बार पूछताछ की जा चुकी है - जिसमें ट्रांजिट रिमांड और उसके बाद की पुलिस हिरासत का समय भी शामिल है। उन्होंने कहा कि जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है, इसलिए अब और पुलिस हिरासत की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने अदालत से आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आग्रह किया।
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