रांची , अक्टूबर 24 -- झारखंड के स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य से मोहब्बत का दावा करने वाले भाजपा नेताओं को अब खेतों में उतरकर किसानों की मेहनत और झारखंड की मिट्टी का सम्मान करना सीखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सिर्फ सोशल मीडिया पर खेती की तस्वीरें और वीडियो साझा करने से खेती नहीं होती, इसके लिए खेतों में पसीना बहाना पड़ता है। मैं आज भी खेती करता हूं, जमीन पर उतरकर फसल उगाता हूं और लोगों को भी खेती के लिए प्रेरित करता हूं। भाजपा के नेताओं को मुझसे यह सीख लेनी चाहिए।
मंत्री डॉ अंसारी ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि झारखंड केवल कोयला, लोहा और खनिज संपदा का नाम नहीं है। यह किसानों, आदिवासियों, मेहनतकश मजदूरों और आम लोगों की धरती है। यदि भाजपा को वास्तव में झारखंड से प्यार है तो उसे सिर्फ खनिजों के दोहन और उन पर राजनीति करने के बजाय यहां के किसानों, उनकी जमीन और उनकी खुशहाली की चिंता करनी चाहिए। दूसरे राज्यों से आकर झारखंड की राजनीति करने वाले भाजपा नेताओं को भी यहां की मिट्टी के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
डॉ. अंसारी ने कहा कि भाजपा कार्यालयों और सोशल मीडिया पर बैठकर किसानों की बात करना आसान है, लेकिन किसान की वास्तविक परेशानी खेत में उतरने पर ही समझ आती है। मैं खेती करता हूं और अपनी उपज भाजपा के घर तक भेजने को भी तैयार हूं। भाजपा नेताओं को फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर खेती करने के बजाय वास्तविक खेतों में उतरना चाहिए।
मंत्री डॉ अंसारी ने कहा कि पिछले वर्ष किसानों को बेहतर सहयोग और समय पर भुगतान सुनिश्चित कराने की दिशा में सरकार ने गंभीर प्रयास किए। किसानों के भुगतान के मामले में झारखंड को भारत सरकार से भी सम्मान मिला। इस वर्ष भी किसानों की फसल अच्छी हो रही है। हमारा संकल्प है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार और अधिक किसानों को योजनाओं का लाभ मिले, उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और भुगतान की प्रक्रिया बेहतर हो। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। किसान मजबूत होगा तो गांव मजबूत होगा और गांव मजबूत होगा तो झारखंड समृद्ध बनेगा।
बाबूलाल मरांडी पर निशाना साधते हुए डॉ. अंसारी ने कहा कि बाबूलाल मरांडी को पहले अपनी पार्टी के भीतर झांकना चाहिए। भाजपा में रहते हुए झारखंड के हितों के सवाल पर विरोधाभासी राजनीति करने से पार्टी के दूसरे नेता भी असहज महसूस कर रहे हैं। यदि वे अपनी ही पार्टी में स्वतंत्र होकर काम नहीं कर पा रहे हैं और झारखंड की मिट्टी तथा यहां के संसाधनों के हितों के सवाल पर उनकी भूमिका स्पष्ट नहीं है, तो उन्हें इस राजनीतिक रिश्ते पर पुनर्विचार करना चाहिए। भाजपा छोड़कर स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीति करें। झारखंड की जमीन और उसके संसाधनों को दिल्ली या गुजरात के हितों के हवाले करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डॉ. इरफान अंसारी ने स्पष्ट कहा कि झारखंड के हितों के साथ किसी को खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मैं किसका बेटा हूं और किसके साथ खड़ा हूं, यह झारखंड की जनता अच्छी तरह जानती है। मैं केवल खाद्य आपूर्ति मंत्री नहीं, बल्कि किसान का बेटा भी हूं। किसानों की मेहनत, उनकी परेशानियों और उनकी जरूरतों को समझता हूं। मेरी राजनीति का उद्देश्य केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि जमीन पर काम करके किसानों को उनका हक और सम्मान दिलाना है।
।डॉ. अंसारी ने कहा कि झारखंड की पहचान सिर्फ खनिज संपदा से नहीं, बल्कि इसकी उपजाऊ मिट्टी, मेहनतकश किसानों और यहां के लोगों से है। झारखंड से सच्ची मोहब्बत करनी है तो खेतों में उतरिए, किसानों का हाथ थामिए और उनकी समृद्धि के लिए काम कीजिए। खेती जमीन पर होती है, सोशल मीडिया पर नहीं; और झारखंड से प्यार भाषणों से नहीं, यहां के किसानों के पसीने का सम्मान करने से साबित होगा।
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