, Feb. 18 -- ...............राज्यपाल ने कहा कि राज्य को खुले में शौच से मुक्त करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। गंदे जल के प्रबंधन और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए 1,525 करोड़ रुपये की योजनाएं संचालित हैं। खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए सरकार 'मिनरल ऑक्शन रूल 2015' का पालन कर रही है। कोयला, लोहा ग्रेफाइट, चूना पत्थर और बॉक्साइट के ब्लॉक तैयार किए गए हैं। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए लिथियम आधारित खनिज क्षेत्रों की पहचान कर उन पर विस्तृत कार्य शुरू कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग शासन को प्रभावी बनाने के लिए किया जा रहा है। युवाओं को पायलट बनाने के लिए 'झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट' को लाइसेंस प्राप्त ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत (वेद-पुराण और ऋषि-मुनियों की परंपरा) के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वर्ष 2021 से 2023 के बीच राज्य के वन क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की गई है, और इस वर्ष 6,450 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण का लक्ष्य है।
इससे पहले झारखंड विधानसभा सभा के अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने अपने प्रारंभिक संबोधन में कहा कि यह बजट सत्र वर्ष 2026 का अत्यंत महत्वपूर्ण सत्र है। यह षष्ठम् झारखण्ड विधान सभा का पंचम सत्र है, जो 18 फरवरी से प्रारंभ होकर 19 मार्च 2026 तक चलेगा। इस सत्र बसमें कुल 17 कार्य दिवस निर्धारित हैं। इन 17 कार्य दिवसों में बजट सहित राज्य की नीतियों, योजनाओं, वित्तीय प्राथमिकताओं तथा जनहित के विविध विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बजट सत्र केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत करने का अवसर नहीं होता, बल्कि यह राज्य की विकास यात्रा का मार्गदर्शक दस्तावेज भी होता है। इस सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2025-2026 का तृतीय अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके माध्यम से चल रही योजनाओं एवं आवश्यक व्ययों की पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, 24 फरवरी 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट सदन के पटल पर रखा जाएगा। यह वार्षिक बजट राज्य की भावी दिशा, विकास की प्राथमिकताओं तथा संसाधनों के न्यायसंगत वितरण का आधार बनेगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सभी माननीय सदस्यों को अनुदान मांगों पर चर्चा, कटौती प्रस्तावों के माध्यम से समीक्षा तथा नीतिगत सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त होगा। अपेक्षा है कि बहस तथ्यपरक, तर्कसंगत और जनोन्मुखी होगी। लोकतंत्र की शक्ति सार्थक संवाद में निहित है, अतः आलोचना हो, विमर्श हो, विचारों का आदान-प्रदान हो-किन्तु सदन की कार्यवाही गरिमा एवं अनुशासन के साथ संचालित हो।
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