रांची , मार्च 10 -- झारखंड विधानसभा बजट सत्र के 10वें दिन आज सदन की कार्यवाही हंगामे के साथ शुरू हुई।

सदन की बैठक शुरू होते ही भाजपा विधायक हाथों में पोस्टर लेकर वेल में पहुंच गए और राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार व कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

इस दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है और कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि दुमका में मजदूर यूनियन के नेताओं को गोली मार दी गई। लेकिन अब तक अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

वहीं श्री मरांडी ने रजरप्पा और गिरिडीह की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि महिला दिवस के अवसर पर गिरिडीह में उपायुक्त का व्यवहार भी सवालों के घेरे में है।

नेता प्रतिपक्ष श्री मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में बिना पैसे कोई काम नहीं हो रहा है और सरकार पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। उन्होंने सदन में भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह सरकार हेमंत सोरेन की अबुआ नहीं, बल्कि बाबुओं की सरकार बन गई है।

इस पर जवाब देते हुए वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि यदि कार्यमंत्रणा समिति में इस विषय पर चर्चा का निर्णय होता तो सदन में जरूर चर्चा कराई जाती। श्री किशोर ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था नियंत्रण में है और भ्रष्टाचार के मामलों पर सरकार सख्ती से कार्रवाई कर रही है। श्री किशोर ने विपक्ष से कहा कि यदि कोई विशेष मामला है तो उसे सदन में रखा जाए, सरकार उस पर कार्रवाई करने के लिए तैयार है। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक आमने-सामने आ गए और सदन में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रहीहंगामे के बीच मंत्री सुदिव्य कुमार ने तिवारी महतो को हाथ दिखाया तो वे वेल में पहुंच गए। भाजपा विधायक ने भी उनका साथ दिया।

इसके बाद स्पीकर नाराज हो गए और तिवारी महतो को मार्शल आउट करने को कहा, जिसके बाद उन्हें सदन से बाहर ले जाया गया। हालांकि वित्त मंत्री के हस्तक्षेप पर उन्हें फिर से सदन में बुला लिया गया।

वहीं सत्र के दौरान विधायक अरूप चटर्जी ने राज्य में संचालित अल्पसंख्यक विद्यालयों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने का मुद्दा उठाया। श्री चटर्जी ने सवाल किया कि जिन अल्पसंख्यक विद्यालयों में छात्रों को शिक्षा दी जा रही है, वहां पढ़ने वाले बच्चों को पाठ्यपुस्तक, कॉपी और मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति योजना का लाभ क्यों नहीं मिल रहा है। इस पर जवाब देते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि संबंधित विद्यालयों को अभी तक सरकारी स्कूल का दर्जा प्राप्त नहीं है, इसलिए उन्हें सीधे तौर पर इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

हालांकि मंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार इस दिशा में प्रयास करेगी, ताकि उन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को भी उचित और सही सरकारी सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार आवश्यक पहल करने पर विचार करेगी।

प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हल्की तकरार देखने को मिली।

विधायक प्रकाश राम ने मैक्लुस्कीगंज को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने और क्षेत्र में ईंट-भट्टें और क्रेशर से हो रहे प्रदूषण को लेकर सवाल उठाया।

इस पर खान विभाग के मंत्री योगेंद्र महतो ने जवाब देते हुए कहा कि मैक्लुस्कीगंज को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का विषय उनके विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव अन्य विभागों से जुड़ा हुआ है। जबकि खान विभाग केवल क्रेशर और ईंट भट्टें से संबंधित मामलों पर ही जवाब दे सकता है।

मंत्री के जवाब पर विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि सदस्यों के सवाल जिस भी विभाग से संबंधित हों, उन्हें सही विभाग तक पहुंचाने की जिम्मेदारी विधानसभा सचिवालय की होनी चाहिए। इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मंत्रियों को सदन में आने से पहले सवालों को लेकर पूरा होमवर्क करके आना चाहिए, ताकि सदस्यों को स्पष्ट जवाब मिल सके।

सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार के सभी मंत्री पूरी तरह जिम्मेदार हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इस प्रश्न को पर्यटन विभाग को भेज दिया जाए और इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया जा सकता है।

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