रांची , मई 09 -- झारखंड की राजधानी रांची में आदिवासी जन परिषद समेत कई आदिवासी और सामाजिक संगठनों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें जनगणना कॉलम में अलग से सरना धर्म कोड लागू करने की मांग उठाई गई।

बैठक में आदिवासी समुदाय की जमीनों की कथित लूट और परिसीमन के बाद झारखंड की राजनीति पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर भी चर्चा की गई।

बैठक में आदिवासी जन परिषद के प्रेमशाही मुंडा, आदिवासी बचाओ मोर्चा से जुड़ी पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव, आदिवासी नेता देवकुमार धान सहित कई जनजातीय नेताओं ने हिस्सा लिया। नेताओं ने कहा कि जनगणना में जनजातीय समुदाय के लिए अलग धर्म कॉलम की व्यवस्था की जानी चाहिए।

पूर्व मंत्री और आदिवासी नेता देवकुमार धान ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के संरक्षण में आदिवासियों की जमीनों की लूट हो रही है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय पर हो रहे चौतरफा हमलों के खिलाफ संघर्ष तेज करना होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आदिवासी अपनी जमीन और संस्कृति पर हो रहे हमलों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

देवकुमार धान ने कहा कि जनगणना 2027 में धर्म वाले कॉलम में सरना धर्म कोड लागू कराने के लिए व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।

मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि आदिवासियों को अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से विभिन्न संस्थाओं में आदिवासी धर्म कॉलम लागू करने की मांग की। उन्होंने छोटानागपुर लॉ कॉलेज के नामांकन फॉर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां धर्म कॉलम में आदिवासियों के लिए अलग विकल्प नहीं था, जिसे उन्होंने हस्तक्षेप कर ठीक कराया।

गीताश्री उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज को जागरूक रहने की जरूरत है, क्योंकि उनकी पहचान के साथ खिलवाड़ की कोशिश की जा रही है।

वहीं आदिवासी जन परिषद के प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि आदिवासियों का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी धर्म कोड को लेकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों में इच्छाशक्ति की कमी दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि देशभर के जनजातीय संगठनों को एकजुट कर व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, ताकि आदिवासी संस्कृति, धर्म और पहचान की रक्षा की जा सके।

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