नयी दिल्ली , मार्च 18 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विशेष धनशोधन नियंत्रण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत के समक्ष पांचवीं पूरक आरोप पत्र दायर की है, जिसमें ग्रामीण कार्य विभाग (आरडब्ल्यूडी), ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र (आरडीएसजे) और झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (जेएसआरआरडीए) के 14 विभागीय इंजीनियरों और अधिकारियों को भ्रष्टाचार के एक मामले में नए आरोपी के रूप में नामित किया गया है।
ईडी के के रांची जोनल कार्यालय ने बुधवार को कहा कि इसके साथ ही इस मामले में आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 36 हो गई है।
एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(ए) के तहत जमशेदपुर की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के आधार पर पीएमएलए के तहत अपनी जांच शुरू की थी।
जांच से पता चला है कि आरडब्ल्यूडी/आरडीएसजे/जेएसआरआरडीए के भीतर कथित तौर पर एक व्यवस्थित रिश्वत और कमीशन गिरोह चल रहा था, जिसमें निविदाओं के आवंटन के बदले ठेकेदारों से कुल निविदा मूल्य का तीन प्रतिशत निश्चित कमीशन वसूला जाता था।
कथित तौर पर कमीशन को पदानुक्रमित तरीके से वितरित किया गया था। तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम को 1.35 प्रतिशत (उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल के माध्यम से), विभागीय सचिव को 0.65-1 प्रतिशत और शेष राशि मुख्य इंजीनियरों और उनके अधीनस्थ इंजीनियरों को दी जाती थी। लगभग 3,048 करोड़ रुपये के कुल निविदा आवंटन के मुकाबले, अपराध की कुल आय 90 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।
नए नामित 14 आरोपियों में सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता सिंगराय टूटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार और प्रमोद कुमार, अधिशासी अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार और अनिल कुमार (सेवानिवृत्त), सहायक अभियंता राम पुकार राम और रमेश ओझा (दोनों सेवानिवृत्त), और पूर्व अधीक्षण अभियंता/अभियंता-प्रमुख उमेश कुमार (सेवानिवृत्त) शामिल हैं।
जांच में अवैध कमीशन राशि के संग्रह, एकत्रीकरण और वितरण में उनकी कथित सक्रिय संलिप्तता पाई गई, जो पीएमएलए की धारा 2(1)(यू) के तहत अपराध है।
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