रांची , जुलाई 18 -- झारखंड में रांची के रहने वाले 18 वर्षीय अवि मोहन कुमार शुक्ला ने एक ऐसा एआई आधारित डिवाइस विकसित किया है, जो हाथियों और इंसानों के बीच होने वाले संघर्ष को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

कम लागत में तैयार इस डिवाइस की फिलहाल पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में टेस्टिंग चल रही है। परीक्षण सफल रहने पर अगस्त से इसे रांची जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाया जाएगा।

रांची निवासी अवि ने हाल ही में 12वीं की पढ़ाई पूरी की है और फिलहाल आईआईटी में प्रवेश की तैयारी के लिए एक वर्ष का ब्रेक लिया है। उनके इस नवाचार को झारखंड वन विभाग, आईआईएम रांची और अमेरिका की इमरजेंसी वेंचर का सहयोग मिला है। उन्हें स्टार्टअप्स झारखंड की ओर से 'बेस्ट बडिंग एंटरप्रेन्योर' सम्मान भी मिल चुका है।

अवि द्वारा विकसित डिवाइस 'इनोबॉक्स' सोलर एनर्जी से संचालित होता है। इसमें एआई कैमरा, रडार और सीस्मिक सेंसर लगाए गए हैं, जो हाथियों और अन्य बड़े जंगली जानवरों की पहचान कर आसपास के ग्रामीणों को समय रहते अलर्ट भेजते हैं। अवि का दावा है कि यह डिवाइस 80 से 85 प्रतिशत तक सटीक पहचान करने में सक्षम है।

वर्तमान में उपयोग किए जा रहे मोशन सेंसर किसी भी हलचल पर सायरन बजा देते हैं, जिससे बैटरी जल्दी खत्म होती है और लोगों को अनावश्यक अलर्ट मिलते हैं। इसके विपरीत, 'इनोबॉक्स' केवल हाथी जैसे बड़े जानवर की पहचान होने पर ही चेतावनी देता है। सोलर आधारित होने के कारण बिजली और बैटरी की समस्या भी नहीं रहती।

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक रवि रंजन के अनुसार, सोशल मीडिया पर अवि के काम की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग ने उन्हें प्रेजेंटेशन के लिए बुलाया। विभाग ने 10 एआई डिवाइस तैयार करने के लिए एक लाख रुपये की सहायता भी दी। फिलहाल पलामू टाइगर रिजर्व में इसकी टेस्टिंग जारी है और शुरुआती परिणाम उत्साहजनक मिले हैं।

झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष लंबे समय से गंभीर समस्या बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 से अब तक हाथियों के हमलों में 474 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में अवि का यह एआई आधारित नवाचार इस चुनौती का प्रभावी समाधान साबित हो सकता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित