रांची , जुलाई 28 -- झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद संजय सेठ ने गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है।

श्री सेठ ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है कि जिस एजेंसी टीपीडीडीएल को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने ब्लैकलिस्ट किया, उसी एजेंसी को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपाएससी) द्वारा परीक्षा आयोजित करने का दायित्व दिया गया। यह निर्णय अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

श्री सेठ ने कहा कि विभिन्न परीक्षाओं में ओएमआर शीट में कथित हेराफेरी कर कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को सफल घोषित किए जाने तथा अधिक अंक प्राप्त करने वाले योग्य अभ्यर्थियों को न्यायालय की शरण लेने के लिए विवश होना पड़ा। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है।

उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों से लगातार भर्ती परीक्षाओं में एक ही एजेंसी की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार ने न तो निष्पक्ष जांच कराई और न ही दोषियों के विरुद्ध कोई कठोर कार्रवाई की। इससे यह आशंका और गहरी होती है कि कहीं पूरे तंत्र को संरक्षण तो नहीं दिया जा रहा।

श्री सेठ ने 26 हजार सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि इस भर्ती में भी व्यापक अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आज तक अंतिम परिणाम जारी नहीं किया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि एक ही परीक्षा का परिणाम सात अलग-अलग चरणों में जारी किया गया। आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि परिणाम किस्तों में घोषित किए गए? इससे पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने कहा कि कट-ऑफ अंक और अभ्यर्थियों के प्राप्तांक सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पूरी तरह संदेह के घेरे में आ गई है। यदि सरकार और आयोग के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो सभी अभ्यर्थियों के अंक एवं कट-ऑफ तत्काल सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

श्री सेठ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी सवाल पूछते हुए कहा कि आप पूरे देश में युवाओं के अधिकारों और रोजगार की बात करते हैं, लेकिन झारखंड के युवाओं के साथ हो रहे अन्याय पर आपकी चुप्पी क्यों है? झारखंड में आपकी पार्टी के समर्थन से सरकार चल रही है। क्या झारखंड के युवा देश के युवा नहीं हैं? या फिर यहां की सरकार को बचाने के लिए युवाओं के भविष्य से हो रहे खिलवाड़ पर मौन साध लिया गया है?उन्होंने कहा कि झारखंड के लाखों युवा इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। राज्य सरकार को तत्काल सभी विवादित भर्ती प्रक्रियाओं की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए तथा योग्य अभ्यर्थियों को न्याय सुनिश्चित करना चाहिए। भाजपा युवाओं के अधिकारों की लड़ाई सड़क से सदन तक पूरी मजबूती से लड़ती रहेगी।

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