, April 12 -- रांची, 12 अप्रैल, झारखंड में बालू के अवैध कारोबार को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है।

श्री मरांडी ने कहा कि बिना प्रशासनिक मिलीभगत के इस तरह का अवैध कारोबार संभव ही नहीं है। उन्होंने कहा कि सिर्फ थानेदारों की ही नहीं, बल्कि एसपी, एसएसपी, डीएमओ, डीएफओ, डीजीपी, मुख्य सचिव और यहां तक कि मुख्यमंत्री तक की जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर अवैध बालू कारोबार की सच्चाई दिखानी है तो इन सभी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों की तस्वीरें भी सामने आनी चाहिए, क्योंकि इनके संरक्षण के बिना यह धंधा नहीं चल सकता।

श्री मरांडी ने आरोप लगाया कि राजधानी रांची में ही खुलेआम बालू से लदे हाईवा और ट्रैक्टर बेखौफ सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जबकि सरकार पूरे राज्य में अवैध खनन रोकने के दावे करती है। मरांडी ने कहा, "जब बाड़ ही खेत चरने लगे, तो सुरक्षा की उम्मीद किससे की जाए?"नेता प्रतिपक्ष ने इसे सीधे तौर पर कमीशनखोरी से जोड़ते हुए कहा कि विभिन्न स्तरों पर बैठे अधिकारी और सरकार के शीर्ष लोग इस अवैध कमाई में लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष का कर्तव्य है कि वह जनता के संसाधनों की लूट और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाए।

श्री मरांडी ने मीडिया से भी अपील की कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में वे इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएं और सच्चाई को सामने लाएं। उन्होंने कहा कि "कलम की धार से सच उजागर करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।"इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड पुलिस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि उनमें थोड़ी भी जवाबदेही बची है तो राज्य में बालू, पत्थर और कोयले की लूट पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। साथ ही उन्होंने ईडी और सीबीआई से इस मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई की मांग की।

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