रांची , मई 04 -- झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि इस देश में पश्चिम बंगाल में ऐसे वोटिंग कराई गयी, जिसमें सरकारी तौर पर सही मतदाताओं को भी वोट से वंचित कर दिया गया।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय श्री भट्टाचार्य ने पार्टी कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन का आयोजन में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया दी है। असम और पश्चिम बंगाल को लेकर उन्होंने केंद्र और भाजपा को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि असम में पहली बार झामुमो ने 17 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा। जिसमें कुल मिलाकर पार्टी को असम में 1.5% से ज्यादा वोट मिले हैं।
श्री भट्टाचार्य ने कहा कि बेहद कम समय में उनके नेता हेमंत सोरेन ने असम में चुनाव प्रचार किया। इस अल्पकालीन अभियान में ही झामुमो ने अपनी छाप छोड़ी है। हमारा फुटप्रिंट असम में रजिस्टर हो गया है। असम की जनता को धन्यवाद देते हुए कहा कि 17 विधानसभा सीटों पर झामुमो ने चुनाव लड़ा उसमें से एक पर झामुमो प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा। वहीं 10 विधानसभा सीट पर झामुमो के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा असम के आदिवासियों के संघर्ष को आगे बढ़ाने का काम जारी रखेगा।
श्री भट्टाचार्य ने कहा कि बांग्लादेश बनाने के समय भी ढाई लाख सेना को नहीं लगाया गया था लेकिन बंगाल जीतने के लिए न सिर्फ ढाई लाख से पारा मिलिट्री फोर्स को लगाया गया बल्कि सभी बड़ी केंद्रीय एजेंसियों को लगा दिया गया। झामुमो ने भारत निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर झामुमो ने सवाल खड़ा किया।
श्री भट्टाचार्य ने कहा कि पहली बार इस देश में पश्चिम बंगाल में ऐसे वोटिंग कराई गयी। जिसमें सरकारी तौर पर सही मतदाताओं को भी वोट से वंचित कर दिया गया। ऐसे में झामुमो का मानना है कि पश्चिम बंगाल में अवैध वोटिंग के नतीजे आये हैं।
श्री भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव आयोग ने अवैध तरीके से बंगाल में चुनाव करवाया है। करीब 29 लाख वोटरों का मामला न्यायिक न्यायाधिकरण के समक्ष पेंडिंग है। अगर कल हुए न्यायाधिकरण का फैसला इन वोटरों के पक्ष में होता है तो ऐसे में फिर क्या होगा। बंगाल का पूरा चुनाव अवैध है और अंत अंत तक बीजेपी और टीएमसी के बीच मतों का फासला यही 29 लाख वोट होंगे। बंगाल का चुनाव से सैन्य बल से जबरन कब्जा किया गया है।
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