रांची , अप्रैल 16 -- झारखंड पुलिस मुख्यालय के सभागार में गुरुवार को डीजीपी तदाशा मिश्रा की अध्यक्षता में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को लेकर समीक्षा बैठक की गई।
यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) शमिल हुए। बैठक का मुख्य विषय केंद्र और राज्य सरकार की प्रत्यर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिलने वाले लाभों और सुविधाओं की समीक्षा थी।
समीक्षा के बाद डीजीपी श्रीमती मिश्रा ने जिलों के सभी एसएसपी/एसपी को स्पष्ट निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रावधानों के अनुसार, आत्मसमर्पित नक्सलियों को निर्धारित लाभ तत्काल उपलब्ध कराए जाएं। इसके साथ ही नक्सलियों के खिलाफ न्यायालयों में लंबित आपराधिक मामलों का स्पीडी ट्रायल (तेजी से सुनवाई) सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक जिले में पुलिस अवर निरीक्षक या इससे ऊपर के एक अधिकारी को नोडल पदाधिकारी नियुक्त करने को कहा गया है, जो आत्मसमर्पित नक्सलियों की व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान करेंगे।
झारखंड सरकार की आत्मार्पण की नीति का उद्देश्य सक्रिय नक्सलियों को हिंसा के रास्ते से हटाकर मुख्यधारा में लाना है। नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर, आवास और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। आज की बैठक में इन लाभों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
बैठक में डीजीपी ने सभी अधिकारियों से कहा कि वह आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के उनके व्यक्तिगत समस्यों के समाधान के लिए अपने अपने जिले से पुलिस अवर निरीक्षक या इसके उपर के पुलिस पदाधिकारी स्तर के एक पदाधिकारी को नोडल पदाधिकारी बनाने तथा आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास से संबंधित योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अन्य सक्रिय नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने हेतु प्रेरित करने का कार्य करें।
इस बैठक में डीजीपी के अतिरिक्त संजीव कुमार, पुलिस उप महानिरीक्षक, एसआईबी, झारखण्ड, नाथु सिंह मीणा, पुलिस अधीक्षक, एसआईबी, झारखण्ड भौतिक रूप से एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग, झारखण्ड, सभी प्रक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक/क्षेत्रीय पुलिस उप-महानिरीक्षक, जिलों के सभी वरीय पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे।
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