रांची , फरवरी 19 -- झारखंड पुलिस की विशेष एंटी-नक्सल इकाई झारखंड जगुआर ने आज रांची स्थित अपने मुख्यालय में 18वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया।
समारोह में डीजीपी तदाशा मिश्र ने बल की नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि राज्य को नक्सलियों से मुक्त करने की लड़ाई में जगुआर का योगदान स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने परिसर में 9 बेड के अस्पताल सहित अन्य निर्माण कार्यों की घोषणा की, ताकि जवानों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
कार्यक्रम की शुरुआत 24 शहीद अधिकारियों व जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि से हुई, जिन्होंने नक्सलियों के खिलाफ लड़ते हुए बलिदान दिया। आईजी अनूप बिरथरे ने बताया कि 19 फरवरी 2008 को गठित यह बल लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म से निपटने के लिए स्थापित किया गया था। तब राज्य नक्सल चरम पर था, लेकिन जगुआर ने लगातार संघर्ष कर स्थिति को बदल दिया। आज झारखंड नक्सल प्रभाव से लगभग मुक्त है, जहां केवल चार जिले बचे हैं, मुख्यतः पश्चिम सिंहभूम का सारंडा जंगल जहां 17 टीमें तैनात हैं।
जगुआर की उपलब्धियां आंकड़ों में साफ झलकती हैं। 114 मुठभेड़ों में 50 से अधिक उग्रवादी ढेर, 300 से ज्यादा गिरफ्तारियां, 4500 हथियार व 3000 आईईडी बरामद। 2025 में अकेले 7 नक्सली मार गिराए गए। संयुक्त अभियानों में सैकड़ों विस्फोटक निष्क्रिय किए। आईजी ने कहा कि अंतिम चरण की लड़ाई चल रही है।
ट्रेनिंग में भी जगुआर नंबर वन है। गृह मंत्रालय ने इसे देश का सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण संस्थान घोषित किया। सम्मानों में 3 राष्ट्रपति पुलिस पदक, 17 गैलेंट्री मेडल, 68 सराहनीय सेवा पदक शामिल हैं। यह बल नक्सल विरोधी अभियान के अलावा वीआईपी सुरक्षा, एयरपोर्ट गार्ड व बम निरोधक दस्ते की जिम्मेदारी भी निभाता है। देवघर-जमशेदपुर एयरपोर्ट पर इसकी बीडीएस टीम की राष्ट्रीय सराहना हुई। कैंपस आधुनिक सोलर प्लांट, स्वच्छ जल, बेहतर आवास से लैस है। हर साल हजारों पौधारोपण हो रहे। डीजीपी ने कहा कि झारखंड नक्सल मुक्त होने की दहलीज पर है। यह समारोह न केवल उत्सव था, बल्कि नक्सल समाप्ति का संकल्प भी।
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