रांची , फरवरी 19 -- झारखंड में रेबीज उन्मूलन और डॉग-बाइट के प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है।
एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने राज्य के सभी सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए जिला स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 17,000 मौतें रेबीज के कारण होती हैं। हालांकि यह 100% घातक बीमारी है, लेकिन समय पर पूर्ण टीकाकरण कराकर इससे पूरी तरह बचा जा सकता है। इसी उद्देश्य के साथ विभाग ने "शिक्षित करें, टीका लगवायें और रेबीज से बचें" के संकल्प को दोहराया है।
अभियान निदेशक ने कड़े निर्देश दिए हैं कि राज्य के सभी जिला अस्पतालों, अनुमंडल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त मात्रा हर समय उपलब्ध रहनी चाहिए। इसके लिए 'डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स एनवेलप 2025-26 के तहत बजट का प्रावधान किया गया है। यदि किसी केंद्र पर दवा की कमी होती है, तो उसे तत्काल वैकल्पिक मदों से क्रय कर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी मरीज को इलाज के बिना न लौटना पड़े।
जन-जागरूकता के लिए स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग, शहरी निकाय और पंचायती राज संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगा। शहर के प्रमुख चौराहों, नगर निगम क्षेत्रों, हाट-बाजारों और सरकारी कार्यालयों के परिसरों में होर्डिंग और बैनर लगाए जाएंगे। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और स्कूलों में दीवार लेखन के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा।
इसके अलावा, जिलों में किए जा रहे कार्यों की निगरानी के लिए एक नोडल पदाधिकारी नामित किया जाएगा और सभी गतिविधियों की जियो-टैग फोटो रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। विभाग ने आम जनता से अपील की है कि कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने पर इसे नजर अंदाज न करें और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर चिकित्सक की सलाह लें।
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