रांची , जुलाई, 30 -- झारखंड को पिछले पांच वर्षों के दौरान राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (नेशनल- कैम्पा) के तहत, 3,310.45 करोड़ रुपये और नगर वन योजना के तहत 22.3 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।
यह जानकारी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने 30 जुलाई को राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब उपलब्ध करवाई। पिछले 5 वर्षों के दौरान, झारखंड में कुल 78,423.96 हेक्टेयर खराब वन भूमि का जिर्णोद्धार किया गया है। मंत्रालय हरित भारत मिशन (जीआईएम), राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (नेशनल कैम्पा ) जैसी योजनाओं / कार्यक्रमों के माध्यम से और राज्यों / संघ राज्य क्षेत्र को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करके वन पुनर्स्थापन गतिविधियों के लिए बढ़ावा दिया जाता है।
इनमें सहायता प्राप्त प्राकृतिक पुनर्जनन, कृत्रिम पुनर्जनन, क्षतिपूर्ति वनीकरण, मृदा एवं नमी संरक्षण उपाय और स्थल - विशिष्ट पारिस्थितिक स्थितियों के आधार पर उपयुक्त स्वदेशी प्रजातियों का वृक्षारोपण शामिल हैं।
मंत्री जी ने यह भी सूचित किया कि जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के प्रति संवेदनशील राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ठोस अनुकूलन गतिविधियों का समर्थन करने के लिए 2015 में एक केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में जलवायु परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय अनुकूलन कोष ( एनएएफसीसी) की स्थापना की गई थी। इसके तहत, झारखंड सहित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 30 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। झारखंड राज्य में, "झारखंड के दो क्षेत्रों में वनों और उन पर निर्भर समुदायों के जलवायु लचीलेपन को बढ़ाना" शीर्षक वाली एक परियोजना के लिए 24.73 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी।
लिखित उत्तर में दी गई जानकारी के अनुसार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डी एस टी) ने "क्लाइमेट वल्नाराबिलिटी एससमेंट फॉर अडप्टेशन प्लानिंग इन इंडिया यूजिंग ए कॉमन फ्रेमवर्क" नामक शीर्षक से एक राष्ट्रीय स्तर का अध्ययन किया। यह वर्तमान जलवायु जोखिमों के संदर्भ में राज्यों और जिलों की सापेक्ष संवेदनशीलता का सूचकांक-आधारित मूल्यांकन प्रदान करता है।
यह अध्ययन भारत में सबसे संवेदनशीलता का संकेतक-आधारित आकनल प्रदान करता है और राज्यों और जिलों के साथ-साथ वर्तमान जलवायु स्थिति के तहत संवेदनशीलता के मुख्य कारणों का भी पता लगाता है। डीएसटी ने झारखंड में राज्य जलवायु परिवर्तन प्रकोष्ठों (एससीसीसी) को संवेदनशीलता और जोखिम आकलन, मानव क्षमता-निर्माण कार्यक्रम, जन जागरूकता कार्यक्रम और संस्थागत क्षमता-निर्माण कार्यकलापों को कने के लिए भी सहयोग दिया है। इस आकलन में, अन्य बातों के अलावा, यह पाया गया कि झारखंड को 'अत्यधिक संवेदनशील' माना गया है।
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