रांची , अप्रैल 09 -- झारखंड के हजारीबाग जिला कोषागार से करोड़ों रुपये के गबन के मामले में पुलिस ने तीन सिपाहियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
करीब 15.41 करोड़ रुपये की अवैध निकासी करने के आरोप है। वहीं इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शंभू कुमार, रजनीश सिंह और धीरेंद्र सिंह के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में तीनों ने वित्तीय गड़बड़ी में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वित्त विभाग द्वारा किए गए डाटा एनालिसिस के दौरान संदिग्ध ट्रांजेक्शन का पता चला। इसके बाद हजारीबाग के अपर समाहर्ता की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने अस्थायी पे आईडी बनाकर सरकारी खजाने से अवैध रूप से रकम निकाली और उसे विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया।
जांच के बाद 21 संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। इन खातों में मौजूद करीब 1.60 करोड़ रुपये की राशि को भी सुरक्षित कर लिया गया है। इस मामले में जिला कोषागार पदाधिकारी द्वारा लोहसिंगना थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
यह मामला सिर्फ तीन सिपाहियों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। आखिर इतने लंबे समय (करीब 8 साल) तक इतनी बड़ी राशि की निकासी कैसे होती रही और किसी को भनक तक नहीं लगी?ज्ञातव्य है कि हाल ही में बोकारो जिले में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लेखा शाखा में पदस्थापित लेखपाल कौशल कुमार पांडेय ने सेवानिवृत्त हवलदार के नाम पर करीब 4.28 करोड़ रुपये की अवैध निकासी कर ली थी।लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने झारखंड की वित्तीय व्यवस्था और ट्रेजरी सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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