लातेहार , अप्रैल 21 -- झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) अंतर्गत छिपादोहर पश्चिमी रेंज के गुरिकरम जंगल में जंगली बाइसन के हमले में दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई।

इस घटना ने पूरे इलाके में भय और शोक का माहौल पैदा कर दिया है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह घटना सोमवार सुबह की है, मोरवाई गांव की दो महिलाएं शिलामनिया देवी (64 वर्ष) और शांति कुंवर (50 वर्ष) रोज की तरह महुआ चुनने के लिए जंगल गई थीं। महुआ सीजन होने के कारण इन दिनों बड़ी संख्या में ग्रामीण जंगल का रुख करते हैं। इसी दौरान अचानक एक जंगली बाइसन ने उन पर हमला कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाइसन बेहद आक्रामक था और उसने बिना किसी उकसावे के दोनों महिलाओं पर जोरदार हमला कर दिया। उसने अपने सींगों से उनके पेट पर कई बार वार किया, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गईं। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दोनों महिलाओं ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।

घटना की सूचना गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। स्वजन और ग्रामीण तत्काल घटनास्थल की ओर दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जंगल के भीतर होने के कारण शवों को बाहर लाने में भी काफी कठिनाई हुई। मंगलवार को ग्रामीणों और स्वजनों के अथक प्रयास के बाद दोनों शवों को बरामद किया जा सका।

मृतका शांति कुंवर अपने पीछे तीन पुत्र और एक पुत्री छोड़ गई हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं शिलामनिया देवी के निधन से भी उनके परिवार में मातम पसरा हुआ है। पूरे गांव में शोक की लहर है और हर आंख नम दिखाई दे रही है। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

अधिकारियों ने मृतकों के स्वजनों को सरकारी प्रावधान के तहत मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। हालांकि, ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश और डर का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल में जंगली जानवरों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आमजन की जान खतरे में पड़ गई है। विशेष रूप से महुआ सीजन के दौरान महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में जंगल जाते हैं, ऐसे में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी हो गए हैं।

ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि जंगल क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाई जाए, खतरनाक जानवरों की निगरानी की जाए और लोगों को सतर्क करने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि जब तक सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराती रहेंगी। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर जंगल और इंसान के बीच बढ़ते टकराव को उजागर कर दिया है, जिस पर तत्काल गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है।

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