रांची , सितंबर 06 -- झारखंड के नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, पर्यटन कला संस्कृति खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार का कल देर रात गिरिडीह में हार्ट अटैक से निधन हो गया।
उनके निधन की खबर से झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि सुदिव्य कुमार गिरिडीह स्थित अपने आवास पर थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन और समर्थक उन्हें कल देर रात तत्काल इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
श्री कुमार के निधन की खबर सामने आते ही झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। पार्टी के नेताओं और प्रदेश के कई वरीय नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया और इसे झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
श्री कुमार झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख नेताओं में शामिल थे और पार्टी के साथ लंबे समय से सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उनके निधन से झामुमो के साथ-साथ झारखंड की राजनीति में भी शोक का माहौल है। सुदिव्य कुमार उर्फ सोनू गिरिडीह में बेहद लोकप्रियइस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके निधन पर शोक जताया और उन्हें श्रद्धांजलि दी है। श्री सोरेन ने अपने एक्स पर लिखा किदेर रात अपने बड़े भाई, हमारे प्रिय सुदिव्य कुमार सोनू जी के निधन का दुःखद समाचार मिला। इस खबर को स्वीकार कर पाना मेरे लिए बेहद कठिन है। सोनू भैया का जाना मेरे जीवन में ऐसी रिक्तता छोड़ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं।
सोनू भैया मेरे लिए सिर्फ एक वरिष्ठ साथी या राजनीतिक सहकर्मी नहीं थे। वे बड़े भाई की तरह थे - स्नेह देने वाले, मार्गदर्शन करने वाले और हर कठिन समय में मजबूती से साथ खड़े रहने वाले। उनके साथ बिताए पल और उनसे मिली सीख हमेशा मेरे साथ रहेंगी।
झारखंड आंदोलन के दौर से ही वे स्मृति-शेष बाबा दिशोम गुरुजी के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से खड़े रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक समर्पित सिपाही के रूप में उन्होंने अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित किया। झारखंडियत के प्रति उनका समर्पण और उनकी जुझारू भावना हमेशा याद की जाएगी।
आज उन्हें याद करते हुए मन बार-बार यही सोचता है कि ज़िंदगी कितनी क्षणभंगुर है। कल तक जो आवाज़ हमारे बीच थी, आज वह सिर्फ स्मृतियों में रह गई है।
सोनू भैया, आपका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। आपकी कमी हमेशा महसूस होगी। आपके स्नेह, आपके संघर्ष और झारखंड के लिए आपकी प्रतिबद्धता को मैं जीवनभर अपने साथ लेकर चलूंगा।
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