रांची , अप्रैल 15 -- झारखंड के धनबाद जिले के व्यस्ततम धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग पर केंदुआडीह थाना क्षेत्र के समीप बुधवार को एनएच 18 सड़क अचानक धंस जाने से हड़कंप मच गया।

घटना के बाद इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सड़क करीब दो फीट तक धंस गई है। वहीं कई स्थानों पर लंबी-लंबी दरारें भी उभर आई हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए और स्थिति को लेकर चिंता जताई।

यह मार्ग धनबाद को बोकारो और रांची से जोड़ने वाली प्रमुख सड़क है, जिस पर रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में अचानक सड़क धंसने की घटना ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। सूचना मिलते ही केंदुआडीह थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और सुरक्षा के मद्देनजर सड़क के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी। पुलिस द्वारा लगातार लोगों को सतर्क किया जा रहा है तथा बोकारो की ओर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से डायवर्ट किया गया है।

स्थानीय पार्षद प्रतिनिधि कृष्णा राउत ने घटना को गंभीर बताते हुए बीसीसीएल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पूर्व में भी गैस रिसाव जैसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें कई लोगों की जान गई और कई बीमार हुए, लेकिन प्रबंधन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने आशंका जताई कि भूमिगत खनन गतिविधियों के कारण ही सड़क धंसने की यह घटना हुई है।

वहीं केंदुआडीह थाना प्रभारी प्रमोद पांडे ने बताया कि पुलिस टीम मौके पर तैनात है और सुरक्षा के सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। संबंधित विभागों एवं बीसीसीएल अधिकारियों को सूचना दे दी गई है।

घटना की सूचना मिलने के बाद क्षेत्र संख्या 7 के महाप्रबंधक सहित डीजीएमएस के कई अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा है और सड़क धंसने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। फिलहाल इस घटना से किसी प्रकार के हताहत नहीं हुई है।

स्थानीय निवासी दिनानाथ ठाकुर ने बताया, "6 अप्रैल को इसी क्षेत्र में पुराने महाप्रबंधक आवास परिसर की दीवार से सटी तीन दुकानों में दरारें पड़ चुकी थीं। प्रशासन और बीसीसीएल ने मिट्टी भराई कर स्थिति को काबू में करने की कोशिश की थी, लेकिन समस्या जड़ से नहीं सुलझी।" यह क्षेत्र पुरानी कोयला खदानों के कारण काफी संवेदनशील है। यहां 1945 से 1992 तक खनन कार्य चला था। 4 दिसंबर 2025 को इसी इलाके में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस रिसाव से तीन लोगों की मौत हो चुकी है।डी जी एम एस ने पहले ही चेतावनी दी थी कि पुरानी माइनिंग के कारण जमीन कमजोर हो गई है और लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट हो जाना चाहिए।

बीसीसीएल क्षेत्र संख्या-7 के महाप्रबंधक जी.सी. शाहा ने कहा, "यहां 1945 से 1992 तक माइनिंग हुई थी। कुछ दिन पहले ग्रामीणों के साथ बैठक हुई थी जिसमें उन्हें जरेडा के तहत बने नए आवासों में शिफ्ट होने की सलाह दी गई थी, ताकि सुरक्षा उपायों को तेजी से पूरा किया जा सके।"स्थानीय लोग बीसीसीएल और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैस रिसाव और जमीन धंसने की शिकायतें पिछले कई महीनों से की जा रही थीं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

प्रशासन और बीसीसीएल की टीम फिलहाल स्थिति पर नजर रखे हुए है। बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है। फिलहाल समाचार लिखे जाने तक सुरक्षा को देखते हुए सड़क बंद है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित