झाबुआ , अक्टूबर 04 -- मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले से एक बार फिर काम की तलाश में आदिवासियों का अन्य राज्यों की ओर पलायन शुरू हो गया है। मेघनगर, थांदला रोड, पंचपिपलिया, बामनिया और भेरूगढ़ आदि रेलवे स्टेशनों से बड़ी संख्या में आदिवासी अपने परिवारों सहित गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश के अन्य जिलों की ओर जाने लगे हैं।
जिले में इस वर्ष कम वर्षा और फसलों की कटाई के साथ रोजगार की कमी भी शुरू हो गई है। ऐसे में आदिवासी परिवारों के सामने काम-काज की कमी हो जाती है। परिवार के भरण-पोषण और अधिक मजदूरी की तलाश में लोग अन्य राज्यों की ओर जाने को मजबूर हैं। जिले में रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत भी इतने काम उपलब्ध नहीं हैं कि सभी आदिवासियों को पर्याप्त रोजगार मिल सके।
झाबुआ में इस वर्ष मानसून सत्र में 31 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे फसलों पर भी प्रभाव पड़ा है। आने वाले सीजन में गेहूं और चने की फसलों के प्रभावित होने की संभावना है। पानी की कमी के चलते मवेशियों के लिए चारा और पानी का संकट रहने की आशंका भी जताई जा रही है। ऐसे में आदिवासी परिवारों सहित अभी से जिले से बाहर अन्य जिलों और राज्यों का रुख कर रहे हैं।
इनमें से अधिकांश आदिवासियों के दीपावली या सीधे होली के अवसर पर भगोरिया हाट के दौरान वापस लौटने की संभावना है। लंबे समय तक परिवारों के साथ पलायन करने से गांवों में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के सामने भी कई तरह की समस्याएं खड़ी हो जाती हैं।
स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होने के कारण मजदूरों को मजबूरी में दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा है। पलायन को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने, रोजगार गारंटी योजना में अधिक काम स्वीकृत करने तथा सूखे की संभावित स्थिति को देखते हुए विशेष रोजगार एवं राहत कार्य शुरू करने की मांग की गई है।
इसी प्रकार के हालात आलीराजपुर जिले में भी बने हुए हैं, जहां इस वर्ष मानसून सत्र में 51 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। झाबुआ और आलीराजपुर जिलों में वर्षा, फसलों की स्थिति और रोजगार के अवसरों के आधार पर प्रशासन की रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश सरकार सूखे की स्थिति का आकलन कर इन्हें सूखाग्रस्त घोषित करने की दिशा में निर्णय ले सकती है।
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