हाजीपुर , मई 16 -- बिहार में वैशाली की जिलाधिकारी, वैशाली श्रीमती वर्षा के निर्देश पर ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत भारत की प्राचीन सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं पारिवारिक धरोहरों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण के लिये जिला प्रशासन, वैशाली की ओर से लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सहदेई प्रखंड अंतर्गत कुम्हारकौल गांव निवासी अमरनाथ सिंह के आवास से लगभग 700 वर्ष से अधिक पुरानी "रामपुरिया दरबार" से संबंधित महत्वपूर्ण राजवंशीय वंशावली एवं ऐतिहासिक अभिलेख प्राप्त हुए हैं, जिन्हें डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करते हुए "ज्ञान भारतम्" पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।

यह वंशावली मेवाड़, राजस्थान से संबंधित प्राचीन राजवंशीय परंपरा, पारिवारिक इतिहास, सामाजिक संरचना एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह ऐतिहासिक धरोहर न केवल एक परिवार अथवा वंश की पहचान को सुरक्षित करती है, बल्कि भारतीय सभ्यता, परंपरा एवं इतिहास के अनेक महत्वपूर्ण तथ्यों को भी संरक्षित रखने का कार्य करती है। कई पीढ़ियों से सुरक्षित रखे गए इन दस्तावेजों में तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था, वंश क्रम, पारिवारिक परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों की झलक देखने को मिलती है।

जिलाधिकारी ने कहा कि ज्ञान भारतम् मिशन का उद्देश्य केवल दस्तावेजों का संग्रह करना नहीं, बल्कि भारत की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्थायी रूप से संरक्षित करना है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों, वंशावलियों एवं ऐतिहासिक अभिलेखों की पहचान कर उनका व्यवस्थित डिजिटलीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी गौरवशाली विरासत से परिचित हो सकें।

ज्ञान भारतम् मिशन के तहत ऐसे प्राचीन दस्तावेजों, पांडुलिपियों, वंशावलियों एवं ऐतिहासिक अभिलेखों का डिजिटलीकरण कर उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से इन दुर्लभ धरोहरों को डिजिटल रूप में संरक्षित कर राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे शोधकर्ताओं, इतिहासकारों, विद्यार्थियों एवं आमजन को भारतीय इतिहास एवं संस्कृति की प्रामाणिक जानकारी प्राप्त हो सके।

जिला प्रशासन ने कहा कि वैशाली जिला ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध रहा है तथा यहां अनेक परिवारों एवं संस्थानों के पास दुर्लभ पांडुलिपियां, पुरानी वंशावलियां, ऐतिहासिक पत्र, ताम्रपत्र, धार्मिक ग्रंथ एवं अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख सुरक्षित हैं। इन धरोहरों का संरक्षण समय की आवश्यकता है, जिससे भारत की गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक विरासत अक्षुण्ण बनी रहे।

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