अमरोहा , अप्रैल 12 -- पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं बिहार के निवर्तमान राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि महाभारत कालीन भारत की प्राचीन विरासत आत्मबोध से विश्वबोध का संदेश देने वाली है। उन्होंने कहा कि हस्तिनापुर साहित्य महोत्सव-2026 साहित्य, कला और संस्कृति का मजबूत आधार बनेगा।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. यतींद्र विद्यालंकार ने रविवार को बताया कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद, श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय एवं बहसूमा रियासत हस्तिनापुर के संयुक्त तत्वावधान में 11 अप्रैल को हस्तिनापुर के निकट बहसूमा रियासत (हंसापुर) में यह भव्य आयोजन संपन्न हुआ।
आरिफ मोहम्मद खान ने हस्तिनापुर के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए बहसूमा रियासत की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने महाराजा जैता सिंह नागर से लेकर राजा नैन सिंह गुर्जर तक के योगदान को याद किया और मुगल काल के संघर्ष तथा 1857 की क्रांति में क्षेत्रवासियों के साहस को नमन किया।
पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के संस्थापक योगऋषि बाबा कर्मवीर (स्वामी कर्मवीर जी महाराज) ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उनके आध्यात्मिक सान्निध्य ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। 'आत्मबोध से विश्वबोध' विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही, जिसमें आत्मचिंतन, आध्यात्मिक जागृति और वैश्विक चेतना पर विचार रखे गए।
इस अवसर पर डॉ. यतीन्द्र कटारिया की पुस्तक 'हस्तिनापुर: कल, आज और कल' सहित कई पुस्तकों का विमोचन हुआ। इनमें आदर्श कुमार जैन की 'अनुभूति', डॉ. वैदेही तामण की कृति, वीर सावरकर पर आधारित पुस्तक तथा सुरेंद्र सिंह की 'उजाले की ओर' प्रमुख रहीं।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने ओज, हास्य, वीर, शृंगार और करुण रस की रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। वेंकटेश्वरा समूह के संस्थापक अध्यक्ष सुधीर गिरि ने अगले वर्ष अप्रैल में 'अमरोहा साहित्य महोत्सव' आयोजित करने की घोषणा की। कार्यक्रम में रजा लाइब्रेरी रामपुर के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्रा, अनेक शिक्षाविद, साहित्यकार, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
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