जौनपुर , अगस्त 11 -- उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में रसूल-ए-खुदा हजरत मोहम्मद मुस्तफा (स.अ.) और उनके बड़े नवासे दूसरे इमाम हजरत इमाम हसन (अ.स.) की शहादत की याद में सोमवार की रात शबे 27 सफर का जुलूस निकाला गया।

हुसैनिया नक़ी फाटक से निकले जुलूस में अंजुमनों ने "हाय रसूले खुदा, हाय इमामे हसन" के नौहे पढ़ते हुए मातम किया। जुलूस में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल रहे।

जुलूस से पूर्व नक़ी फाटक पर मजलिस हुई। सोजख्वानी सै. मो. अब्बास काज़मी ने अपने साथियों के साथ की, जबकि पेशख्वानी फ़ैज़ व मोहम्मद ने की। मजलिस को संबोधित करते हुए धर्मगुरु मौलाना महफूजुल हसन खां ने कहा कि रसूल-ए-खुदा ने पूरी दुनिया तक अल्लाह का पैगाम पहुंचाया और मजलूमों, गुलामों, महिलाओं, बेसहारा व यतीमों को उनका हक दिलाने के साथ इंसानियत, सच्चाई, अमन और शांति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इस्लाम समानता और मानवता का संदेश देता है। यदि इंसान कुरान और मोहब्बते अहलेबैत की शिक्षाओं पर अमल करे तो वह सच्चाई और सदाचार की राह पर आगे बढ़ सकता है।

मजलिस के बाद शबीहे अलम निकाला गया। इसके पश्चात नक़ी फाटक के सामने मस्जिद पर सै. बाक़र मेहंदी ने तकरीर करते हुए रसूल-ए-खुदा और इमाम हसन की शहादत के मसाएब बयान किए। माहौल गमगीन हो गया और लोगों की आंखें नम हो गईं। इसके बाद शबीहे ताबूत निकाला गया। जुलूस में शहर की अंजुमनों जुल्फेकारिया बड़ी मस्जिद, अजादारिया बारादुअरिया, कौसरिया रिजवी खां और असगरिया पुरानी बाजार ने नौहा पढ़ते और मातम करते हुए हिस्सा लिया। जुलूस मल्हनी पड़ाव होते हुए इमाम चौक वक्फ बीकानी बीबी, डढ़ियाना टोला तक गया और पुनः नक़ी फाटक पहुंचकर संपन्न हुआ।

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