जौनपुर , अक्टूबर 20 -- विजयादशमी के पावन पर्व पर जौनपुर की ऐतिहासिक राजा हवेली में राज परिवार की परंपराओं के अनुरूप इस वर्ष भी शस्त्र पूजन का आयोजन मंगलवार को विधि-विधान और राजसी परंपराओं के साथ संपन्न हुआ। शस्त्र पूजन राजपुरोहित पंडित जनार्दन मिश्र के देखरेख में वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार कराया गया।

राजा जौनपुर अवनींद्र दत्त के अस्वस्थ होने के कारण महाराज दरबार हॉल में उपस्थित नहीं हो सके, हालांकि उनकी अनुपस्थिति में भी राज परिवार की वर्षों पुरानी परंपराओं और निर्धारित रीति-रिवाजों का निर्वहन पूरी श्रद्धा एवं अनुशासन के साथ किया गया।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार हवेली राजा जौनपुर में शस्त्र पूजन की परंपरा उनके पूर्वज राजा शिवलाल दत्त ने 1778 में शुरू की थी , तब से आज तक चली आ रही है , शस्त्र पूजन का यह 248 वाँ वर्ष है। जौनपुर रियासत के 12 वें नरेश कुंवर अवनींद्र दत्त के हाथों दशहरा पर्व पर शस्त्र पूजन होता रह है। राजा के दरबार का शानदार दृश्य देखने को मिलता है। जिसमें शहर के गणमान्य, व्यापारी, अलग लिवास में साफे की पगड़ी व काली कोट पहने दरबार हाल की शोभा बढ़ाते हैं। यही नहीं राजा जौनपुर के पोखरा पर मेला एवं राजा जौनपुर के हाथों रावण दहन देखने के लिए गांव देहात से आने वाली भीड़ जुटती है।

जौनपुर रियासत के राज डिग्री कालेज के पूर्व प्राचार्य डाक्टर अखिलेश्वर शुक्ला ने बताया कि जौनपुर रियासत के प्रथम नरेश राजा शिवलाल दत्त ने 1798 में विजय दशमी के दिन शस्त्र पूजन एवं दरबार की शुरुआत की थी। दरबार हाल में उस समय जिलेदार (ठिकानेदार), सर्वराकार, राज वैध, हकीम, व्यापारी सहित गणमान्यजनों की उपस्थिति में शस्त्र पूजन वैदिक रीति-रिवाज से राज ज्योतिषी के निर्धारित लग्नानुसार संपन्न हुआ करता था। तत्पश्चात द्वितीय राजा बाल दत्त की धर्मपत्नी रानी तिलक कुंवर ने 1848 में पोखरे पर विशाल मेले की शुरुआत की थी। राजा जौनपुर की सवारी शाही अंदाज में हवेली से मानिक चौक, सिपाह होते हुए मेला स्थल (राजा साहब का पोखरा) तक पहुंच कर रावण दहन करने के बाद शमी पूजन करते हुए वापस हवेली पहुंचती है ।

इस दौरान राजा का दर्शन करने वालों की भीड़ देखने को जुटती थी। यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। महारानी तिलक कुंवर ने इसी वर्ष (1845) में रामलीला की शुरुआत की थी, जो रामनगर में होने वाली रामलीला के तर्ज पर होता था। जिसका प्रारंभ राजा बाजार से होकर राजा साहब के पोखरा पर राम-रावण युद्ध के बाद रावण दहन फिर राज तिलक के पश्चात पूर्ण होता था। पंडितजी की रामलीला ने इसे जारी रखने का प्रयास किया है। वर्तमान में अनेकों घरानों, संगठनों की तरफ से शस्त्र पूजन किया जाता है, लेकिन जौनपुर रियासत के हवेली स्थित आकर्षक दरबार हाल में राज पुरोहित सहित पांच पंडितों की उपस्थिति में शस्त्र पूजन होता है ।

इसी तरह हवेली राजा सिंगरामऊ में भी विजय दशमी के दिन गुरुवार को कुंवर जय सिंह उर्फ जयबाबा ने विधि विधान के साथ शस्त्र पूजन किया यह परंपरा उनके यहां से भी सैकड़ो वर्षों से चली आ रही है। जौनपुर नगर में राष्ट्रीय स्वयं संघ के स्वयंसेवकों ने संघ के शताब्दी वर्ष पर पथ संचलन किया जिसे देखने के लिए भीड़ लगी हुई थी।

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