जौनपुर , अगस्त 28 -- देश के महान स्वतंत्रता सेनानी एवं मशहूर शायर रघुपति सहाय उर्फ फ़िराक़ गोरखपुरी की 130वीं जयंती जौनपुर में पूरे उल्लास के साथ मनायी गयी।

फिराक का जन्म 28 अगस्त 1896 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में कायस्थ परिवार में हुआ था , इनका मूल नाम ( पूरा नाम ) रघुपति सहाय था।

लक्ष्मीबाई ब्रिगेड की अध्यक्ष मंजीत कौर ने कहा कि कला स्नातक में पूरे प्रदेश में चौथा स्थान पाने के बाद वे आई.सी.एस. में चुने गये , 1920 में नौकरी छोड़ दी तथा स्वराज्य आंदोलन में कूद पड़े तथा डेढ़ वर्ष की जेल की सजा भी काटी। जेल से छूटने के बाद जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस के दफ्तर में अवर सचिव की जगह दिला दी , बाद में नेहरू जी के यूरोप चले जाने के बाद अवर सचिव का पद छोड़ दिया , फिर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 1930 से लेकर 1959 तक अंग्रेजी के अध्यापक रहे । उन्होंने कहा कि 1970 में उनकी उर्दू काव्यकृति 'गुले नग़्मा' पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। गुले-नग्मा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार , ज्ञानपीठ पुरस्कार और सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड से सम्मानित किया गया। बाद में 1970 में इन्हें साहित्य अकादमी का सदस्य भी मनोनीत कर लिया गया था। उन्होंने कहा कि फिराक गोरखपुरी को साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन 1968 में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था।

उन्होंने कहा कि फिराक गोरखपुरी ने अपने साहित्यिक जीवन का श्रीगणेश गजल से किया था। अपने साहित्यिक जीवन में आरंभिक समय में 06 दिसंबर, 1926 को ब्रिटिश सरकार के राजनैतिक बंदी बनाए गए। उन्होंने कहा कि फिराक गोरखपुरी ने परंपरागत भावबोध और शब्द-भंडार का उपयोग करते हुए उसे नयी भाषा और नए विषयों से जोड़ा। उनके यहाँ सामाजिक दुख-दर्द व्यक्तिगत अनुभूति बनकर शायरी में ढला है। दैनिक जीवन के कड़वे सच और आने वाले कल के प्रति उम्मीद, दोनों को भारतीय संस्कृति और लोकभाषा के प्रतीकों से जोड़कर फिराक ने अपनी शायरी का अनूठा महल खड़ा किया । फारसी, हिंदी, ब्रजभाषा और भारतीय संस्कृति की गहरी समझ के कारण उनकी शायरी में भारत की मूल पहचान रच-बस गई है। उन्होंने कहा कि महान शायर एवं स्वतंत्रता सेनानी फ़िराक़ गोरखपुरी का तीन मार्च 1982 को निधन हो गया ।

जौनपुर जिले के सरावां गांव में स्थित शहीद लाल बहादुर गुप्त स्मारक पर आज हिंदुस्तान सोशलिष्ट रिपब्लिकन आर्मी व लक्ष्मीबाई ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने महान शायर एवं स्वतंत्रता सेनानी फ़िराक़ गोरखपुरी की 130 वीं जयंती मनायी ।

इस अवसर पर डॉक्टर धरम सिंह , मैनेजर पांडेय , अनिरुद्ध सिंह ,अजय ,मंजीत कौर आदि कार्यकताओं ने शहीद स्मारक पर मोमबत्ती व अगरबत्ती जलाया और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

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