जौनपुर , अगस्त 02 -- उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में जफराबाद थाना क्षेत्र के राजेपुर कचगांव का सौहार्द बनाने वाला ऐतिहासिक (कजरहवा) कजली मेला 173 वें साल भी बुधवार की शाम को संपन्न हुआ।

इस मेले में आई बरात बिन दुल्हन के एक बार फिर वापस हो गई। दोनों गांवों के बीच दुल्हन के लिए खूब जुबानी जंग हुई। वैश्विक महामारी कोरोना के चलते दो साल तक आयोजन नहीं हो पाया था।

बुजुर्गों के मुताबिक यह परंपरा लगभग 173 साल पुरानी है। राजेपुर व कजगांव से लड़कियां जरई बहाने राजेपुर के कजरहवा पोखरा पर आती हैं। इनके बीच कजली का मुकाबला होता है वे एक-दूसरे से जीतना चाहती हैं, लेकिन शाम होते-होते कोई परिणाम सामने नहीं आता। राजेपुर की तरफ से दद्दू साव तथा कजगांव की लड़कियों की ओर से कालिका साव लड़कियों को घर ले जाने को आए।

लड़कियों ने कहा कि जब तक कजरी का फैसला नहीं हो जाता तब तक हम सभी यहां से नहीं जाएंगे। इस पर राजेपुर की लड़कियों के सदस्य दद्दू साव ने कहा कि अब शाम हो गई है। पोखरे पर रहकर कजरी करना ठीक नहीं है। सभी लोग मेरे घर चलें वहीं पर कजरी मुकाबला होगा। वहां भी पूरी रात कजली चली, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकल सका। जब कजगांव की लड़कियां जाने लगी तो दद्दू साव ने परंपरा के अनुसार उनकी विदाई की।

यही परंपरा इन दोनों गावों के लोग प्रतिवर्ष मनाते चले आ रहे हैं। दोनों गांवों की तरफ से दूल्हा आते हैं, लेकिन दुल्हन नहीं ले जा पाते। इस बार राजेपुर से बारात में दूल्हा नाटे सज धज कर डीजे,घोड़ा,के साथ पोखरा पर पहुंच कर नाई जलील अहमद, पंडित झंझट कचगांव के लोगों से दुल्हन देने के लिए गाली के साथ मांग रहे थे।वहीं दूसरे पोखरे के किनारे कच गांव के दूल्हा रहीस,करिया,गोलू,सब्बीर, नाई राजेश शर्मा पंडित रितेश कुमार पांडेय ने भी गाली के साथ दुल्हन देने के लिए राजेपुर से मांग करते रहे लेकिन बिन दुल्हन दोनों तरफ के दूल्हा मायूस होकर चले गए।

इस अवसर पर कचगांव के चेयरमैन फिरोज खान,छोटेलाल यादव,रमेश यादव,अबरार शाह ,आनंद राव,व्यवस्था में लगे रहे।जफराबाद की पुलिस के जवान मेले में चक्रमण करते रहे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित