पटना, नवंबर 20 -- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दसवें शपथग्रहण समारोह में बिहारी गमछा जोश औए अभिवादन का प्रतीक बन गया।

बिहार में सम्पन्न हुए चुनाव के दौरान आयोजित रैलियों में गमछा लहराना एक फैशन बन गया था और जब से प्रधानमंत्री मोदी ने गमछे को लहराया, इसकी तो पौ बारह हो गयी है। बस इसे गले मे लटकाओ और जब मन प्रसन्न हो जाये, तालियां बजाने की जगह इसी को लहराओ।

गमछा लहर रहे युवक राजीव तिवारी से पूछा तो पता चला जनाब भाजपा युवा मोर्चा के क्षेत्रीय पदाधिकारी हैं। यूनीवार्ता ने पूछा बड़े खुश नजर आ रहे हैं, गमछा लहरा रहे हैं। श्री तिवारी ने जवाब दिया गमछा प्रधानमंत्री को बहुत पसंद है और अब यह खुशी के साथ सम्मान का प्रतीक बन गया है। श्री तिवारी ने कहा कि कुछ लोग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का विरोध करने की मनसा से गमछे का भी विरोध करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि गमछा तो हमारी समृद्ध गंवाई संस्कृति का प्रतीक है। इसे, गले मे लटकाओ, जमीन पर बिछाओ या भूख लगे तो इसी में सतुआ सान के खाओ।

मंत्री शपथ ले रहे थे और जिन्हें भी दर्शक दीर्घा से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का अभिवादन करना था, बस गमछे को लहरा रहा थे। देखते देखते गमछा जोश का प्रतीक बन गया था। अब क्या कहें भाई गमछा, तू अतीत है, वर्तमान है, सभ्यता है, संस्कृति है, एक सोच है या जोशोखरोश है।

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