नयी दिल्ली , सितम्बर 22 -- वायु सेना के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बेस जोधपुर में अगले महीने दुनिया के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान अपने करतब तथा युद्ध कौशल दिखाते हुए आसमान में गर्जन करेंगे।
वायु सेना उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने मंगलवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि वायु सेना 26 सितम्बर से 12 अक्टूबर तक दूसरा द्विवार्षिक बहुराष्ट्रीय अभ्यास तरंग शक्ति 2026 आयोजित कर रही है। यह इस अभ्यास का दूसरा संस्करण है । इससे पहले यह अभ्यास 2024 में हुआ था। उन्होंने कहा कि इसी बीच आठ अक्तूबर को वायु सेना दिवस भी है इसलिए इस अभ्यास का महत्व और बढ जाता है। अभ्यास के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में कम से कम दस देशों के वायु सेना प्रमुख और 30 से अधिक देशों के वरिष्ठ वायु सेना अधिकारी भी हिस्सा लेंगे।
एयर मार्शल दीक्षित ने बताया कि अभ्यास में अमेरिका ,फ्रांस , आस्ट्रेलिया , जर्मनी , संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और बंगलादेश सहित सात वायु सेना अपने लड़ाकू और मालवाहक विमानों के साथ हिस्सा लेंगी। इसके इसके अलावा 32 देशों के प्रतिनिधि इसमें पर्यवेक्षक देश के रूप में हिस्सा लेंगे। अभ्यास के लिए 65 देशों को निमंत्रण दिया गया था।
अभ्यास के दौरान अमेरिका का शक्तिशाली एफ-35 लड़ाकू विमान पहली बार भारत में किसी अभ्यास में हिस्सा लेगा। इसके अलावा अमीरात वायु सेना का एफ -16 , फ्रांस के राफेल , जर्मन वायु सेना ए -400 , आस्ट्रेलिया के सी-130, श्रीलंका का किंग एयर 350 और बंगलादेश का सी 130 जे विमान आकाश में अपने रण कौशल का प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना के स्वदेशी तेजस विमान के साथ-साथ राफेल, सुखोई-30 , मिग-29 , जगुआर , मिराज , हल्का लड़ाकू हेलिकॉप्टर , अवाक्स प्रणाली, आई एल -78, एम आई -17 हेलिकॉप्टर, एमआई-35 और उन्नत हल्का हेलिकॉप्टर अपने जौहर दिखाएंगे।
एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य दुनिया को भारतीय वायु सेना की क्षमता के प्रदर्शन के साथ-साथ देश की रक्षा उत्पादन क्षमता से भी रूबरू कराना है। उन्होंने कहा कि अभ्यास का आयोजन दुनिया की बड़ी वायु सेनाओं के साथ संयुक्त अभियान की रणनीति , तालमेल और क्षमता को बढाना है।
एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय वायु सेना द्विपक्षीय रक्षा अभ्यास करती रही थी लेकिन अब मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसका दायरा बढाकर अभ्यासों में कई देशों की वायु सेनाओं को शामिल किया जा रहा है।
तेजस मार्क 1 ए विमान की आपूर्ति में हो रही देरी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यह देरी इंजन नहीं मिलने के कारण हुई लेकिन अब इंजन मिल गये हैं और उन्हें विमानों में फिट किया गया है। अभी परीक्षण किये जा रहे हैं और कुछ तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के बाद अगले दो तीन महीने के बाद ये विमान वायु सेना को मिलने का रास्ता साफ हो जायेगा।
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