करक (जॉर्डन) , अक्टूबर 24 -- जॉर्डन के करक प्रांत के हमूद गांव में एक गिरजाघर पर हुए हमले में गंभीर रूप से घायल दो लोगों में से एक की शनिवार को मौत हो जाने से मृतकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई। प्रिंस अली सैन्य अस्पताल के निदेशक ने यह जानकारी दी है।

अस्पताल निदेशक ने बताया कि हमले के बाद गंभीर रूप से घायल दोनों लोगों की बड़ी सर्जरी की गई थी और उन्हें गहन चिकित्सा निगरानी में कृत्रिम श्वसन प्रणाली पर रखा गया था। इनमें से एक की बाद में मौत हो गई।

जॉर्डन में वेटिकन के राजदूत और आर्चबिशप जियोवानी पिएत्रो डाल तोसो ने शनिवार को हमले की निंदा करते हुए कहा कि धार्मिक सेवा के दौरान निर्दोष श्रद्धालुओं को निशाना बनाना ऐसा कृत्य है, जिसकी पूरी तरह निंदा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म नफरत नहीं, बल्कि शांति का संदेश देता है।

धर्माध्यक्ष डाल तोसो ने बताया कि उन्होंने बिशप विलियम शोमाली के साथ करक प्रांत के कई अस्पतालों का दौरा कर घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पोप की ओर से संवेदना और एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से देखा कि जॉर्डन के ईसाई और मुस्लिम समुदाय के लोग किस तरह एक-दूसरे के साथ खड़े हैं और सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए कैथोलिक गिरजाघर की प्रतिबद्धता दोहराई।

यरुशलम में ईसाई गिरजाघरों के धर्माध्यक्षों और प्रमुखों ने भी शनिवार को दक्षिणी जॉर्डन के करक प्रांत के हमूद गांव स्थित सेंट जॉर्ज ग्रीक ऑर्थोडॉक्स गिरजाघर पर हुए आतंकवादी हमले की निंदा की और जॉर्डन तथा उसके लोगों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने बयान में कहा कि यह आतंकवादी कृत्य मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध, सभी पवित्र धार्मिक एवं मानवीय मूल्यों का खुला उल्लंघन और जॉर्डन के राष्ट्रीय ताने-बाने पर हमला है, जो मुस्लिमों और ईसाइयों को एकता तथा भाईचारे के सूत्र में बांधता है।

उन्होंने क्षेत्र के सभी गिरजाघरों से शनिवार दोपहर 12 बजे अपनी घंटियां बजाकर एकजुटता व्यक्त करने तथा मृतकों की आत्मा की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करने का आह्वान किया।

अम्मान में फलस्तीन के राजदूत अतल्लाह खैरी ने भी गिरजाघर पर हुए हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार की प्रार्थना के दौरान गिरजाघर के भीतर जॉर्डन के नागरिकों को निशाना बनाकर किया गया यह क्रूर हमला मानवता के खिलाफ सबसे जघन्य अपराधों में से एक है। उन्होंने कहा कि ऐसी आपराधिक और विनाशकारी विचारधारा का धर्म, इस्लाम या मुस्लिमों से कोई संबंध नहीं है।

श्री खैरी ने कहा कि आतंकवादी समूह और हत्यारे आपराधिक गिरोह दुनिया भर के सभी लोगों और देशों के लिए खतरा हैं। उनसे निपटना और उनका प्रतिरोध करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के महासचिव इस्माइल औल्द शेख अहमद ने भी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों और निर्दोष नागरिकों पर हमला मानवीय मूल्यों तथा अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का स्पष्ट उल्लंघन है और सामाजिक शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा है।

उन्होंने मृतकों के परिजनों तथा जॉर्डन के नेतृत्व, सरकार और जनता के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ जॉर्डन के प्रयासों के प्रति संगठन की पूर्ण एकजुटता दोहराई।

इससे पहले, किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने शुक्रवार को कहा था कि करक में आतंकवादी हमले के जिम्मेदार लोगों को कठोरतम सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि विश्वासघातपूर्ण कृत्यों के जरिए जॉर्डन के लोगों को बांटने की कोशिश उनकी एकता और दृढ़ता के सामने विफल होगी।

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