नयी दिल्ली , सितंबर 05 -- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने जैव संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभ के समान बंटवारे की व्यवस्था के तहत 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित करने का महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है।
जैव विविधता प्राधिकरण ने कड़वी लौकी, भिंडी, मिर्च और प्याज जैसी चार प्रमुख सब्जी फसलों से जुड़े जैव संसाधनों के उपयोग से प्राप्त 8.23 करोड़ रुपये की लाभ-बंटवारा राशि 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और पांच केंद्रशासित प्रदेशों की जैव विविधता परिषदों को देने की मंजूरी दी है।
प्राधिकरण के अनुसार यह राशि जैव संसाधनों तक पहुंच और उनके उपयोग से प्राप्त लाभ को स्थानीय स्तर पर साझा करने की व्यवस्था के तहत दी जा रही है। इसका उद्देश्य जैव विविधता के संरक्षण और उसके सतत उपयोग में स्थानीय समुदायों की भागीदारी तथा उनके हितों को सुनिश्चित करना है।
इन चार फसलों से जुड़े लाभ-साझाकरण की संचयी राशि प्राप्त करने वाले राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सबसे आगे हैं। मध्य प्रदेश को करेला मिर्च और प्याज की खेती के कारण अधिक राशि मिल रही है जबकि महाराष्ट्र को देश के प्याज उत्पादन क्षेत्र में उसकी बड़ी हिस्सेदारी का लाभ मिला है। देश के कुल प्याज की खेती के क्षेत्र में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत से अधिक है। चारों फसलों के लिए सबसे अधिक राशि प्राप्त करने वाले 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को कुल मिलाकर लाभ-साझाकरण के रूप में देय राशि इस प्रकार है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित