लखनऊ , जुलाई 23 -- उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को जैव ऊर्जा और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो (आईबीईटी एक्सपो) 2026 की तैयारियों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक बुधवार देर शाम को आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने की। बैठक में मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा आशीष गोयल, उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) के निदेशक रवींद्र सिंह, सचिव पंकज सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और जैव ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

इस दौरान ए. के. शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश ऊर्जा परिवर्तन, हरित विकास और निवेश का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि आईबीईटी एक्सपो-2026 जैव ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, संपीड़ित जैव गैस (सीबीजी), एथेनॉल, बायोडीजल, सतत विमानन ईंधन (एसएएफ), अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन तथा अन्य हरित प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रदेश को वैश्विक पहचान दिलाने का मंच बनेगा।

उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान राज्य होने के कारण उत्तर प्रदेश के पास कृषि अवशेष का विशाल भंडार उपलब्ध है। श्री शर्मा ने कहा कि लगभग 1.7 करोड़ टन कृषि अवशेष में से वर्तमान में केवल 50 लाख टन का ही उपयोग हो रहा है। इस पूरी क्षमता का दोहन कर प्रदेश हरित ऊर्जा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार उत्तर प्रदेश को जैव ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है तथा समय की आवश्यकता के अनुरूप नीतियों को और सशक्त बनाया जाएगा।

ऊर्जा मंत्री ने सभी विभागों, औद्योगिक संगठनों और हितधारकों से समन्वित प्रयास करते हुए एक्सपो को ऐतिहासिक बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से राज्य में निवेश, रोजगार, तकनीकी नवाचार और सतत विकास को नई गति मिलेगी तथा हरित ऊर्जा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की अलग पहचान स्थापित होगी।

इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो (आईबीईटी एक्सपो) 2026 का आयोजन 11 से 13 अगस्त तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में उत्तर प्रदेश सरकार और यूपीनेडा द्वारा इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (आईएफजीई) के सहयोग से किया जाएगा। तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत और विदेशों के नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, उद्योगपति, निवेशक और ऊर्जा विशेषज्ञ भाग लेंगे।

एक्सपो में 25 से अधिक सम्मेलन सत्र, 120 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वक्ता, 150 से अधिक प्रदर्शक तथा हजारों प्रतिनिधि और व्यावसायिक आगंतुक शामिल होंगे।

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