वाराणसी , जून 27 -- उत्तर प्रदेश सरकार की औद्योगिक और कौशल विकास आधारित नीतियों का असर अब जेलों में भी दिखाई देने लगा है। इसका परिणाम यह है कि सेंट्रल जेल का काष्ठ उद्योग आज नई ऊंचाइयों को छू रहा है। बंदियों को हुनर और रोजगार से जोड़ने की पहल ने जेल उद्योग को नई पहचान दिलाई है।
सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों का हुनर अब जेल प्रशासन के लिए नई पहचान बनता जा रहा है। कभी अपराध की राह पर चलने वाले हाथ आज अपने श्रम, कौशल और कला से समाज के लिए उपयोगी वस्तुएं तैयार कर प्रायश्चित की मिसाल पेश कर रहे हैं। वाराणसी सेंट्रल जेल के बंदी विभिन्न प्रकार के उपयोगी फर्नीचर तैयार कर रहे हैं।
इन कैदियों के हुनर से जेल के काष्ठ उद्योग में तैयार होने वाले फर्नीचर की मांग लगातार बढ़ रही है। इस उद्योग से जुड़े बंदी जब रिहा होकर अपने घर लौटते हैं, तो वे अपने साथ एक ऐसा हुनर लेकर जाते हैं, जो उनके परिवार के भरण-पोषण का साधन बनता है।
सेंट्रल जेल के अधीक्षक राधा कृष्ण मिश्रा ने बताया कि यहां निर्मित फर्नीचर के ऑर्डर सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों तथा अन्य संस्थानों से लगातार मिल रहे हैं। जेल प्रशासन के अनुसार यहां तैयार होने वाले लकड़ी के उत्पादों में उच्च गुणवत्ता वाली लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिससे उनकी मजबूती और टिकाऊपन सुनिश्चित होता है।
बंदी गवर्नर चेयर भी तैयार करते हैं। इतना ही नहीं, जिन न्यायाधीशों द्वारा उन्हें उनके अपराधों की सजा सुनाई जाती है, उनके लिए भी कुर्सियां तथा अन्य फर्नीचर यहीं तैयार किए जाते हैं। जेल का फर्नीचर उद्योग बंदियों के जीवन में आत्मविश्वास और सुधार की नई पटकथा लिख रहा है।
जेलर अखिलेश कुमार ने बताया कि जेल के काष्ठ उद्योग में करीब 80 बंदी कार्यरत हैं। इन बंदियों की मेहनत और हुनर का परिणाम यह रहा कि वित्तीय वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2025-26 में उद्योग की आय में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जेल प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के उद्योग बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हुनर और श्रम के सहारे बंदी अब अपने अतीत की गलतियों को पीछे छोड़ नई पहचान बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
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