रांची , अक्टूबर 23 -- झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों एवं डाटा एंट्री ऑपरेटरों के साथ हो रहे कथित वेतनगत भेदभाव के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।

संघ के केंद्रीय अध्यक्ष अजय राय ने निगम के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) को ईमेल के माध्यम से विस्तृत ज्ञापन भेजकर कंप्यूटर ऑपरेटरों को वर्तमान 'स्किल्ड' श्रेणी से 'हाईली स्किल्ड' श्रेणी में वर्गीकृत करने, निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने तथा पेरोल और आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कर्मियों के वेतन में व्याप्त असमानता दूर करने की मांग की है।

श्री राय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक ही निगम में समान प्रकृति का काम करने वाले कर्मचारियों के बीच केवल नियुक्ति की व्यवस्था के आधार पर वेतन में बड़ा अंतर होना गंभीर चिंता का विषय है। यदि आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कर्मचारी भी समान योग्यता, समान कार्यदायित्व, समान कार्यस्थल और समान स्तर की जिम्मेदारियों के साथ काम कर रहे हैं, तो उनके पारिश्रमिक में अंतर के औचित्य की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए। कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता और वास्तविक कार्य के मूल्यांकन के बजाय केवल उनके नियोजन के तरीके को आधार बनाना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि निगम में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों का काम केवल टाइपिंग या सामान्य डाटा एंट्री तक सीमित नहीं है। ये कर्मचारी टेक्निकल विंग, वर्क एंड मैटेरियल मैनेजमेंट, प्रोजेक्ट विंग, फाइनेंस एंड अकाउंट्स, कमर्शियल एवं रेवेन्यू तथा एचआर और एस्टैब्लिशमेंट जैसे महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारी निभाते हैं। सेप, ईआरपी, एडवांस्ड एक्सेल, एमआईएस रिपोर्ट, डाटा वेरिफिकेशन, रिकंसिलिएशन, बिलिंग एवं राजस्व संबंधी रिकॉर्ड, टेंडर दस्तावेज, विभागीय रिपोर्ट और आधिकारिक पत्राचार जैसे तकनीकी एवं विशेष प्रकृति के कार्यों का निष्पादन करते हैं।

जब काम तकनीकी और बहुआयामी है, तो वेतन का निर्धारण भी वास्तविक कार्य और कौशल के आधार पर होना चाहिए। संघ का कहना है कि इन जिम्मेदारियों के अनुरूप कंप्यूटर ऑपरेटरों की कौशल श्रेणी का वस्तुनिष्ठ आकलन किया जाना चाहिए तथा उन्हें 'हाईली स्किल्ड' श्रेणी में वर्गीकृत करने की मांग पर गंभीरता से निर्णय लिया जाना चाहिए।

अजय राय ने अपने ज्ञापन में कोड ऑन वेजेज (झारखंड) रूल्स, 2021 के प्रावधानों तथा कंप्यूटर ऑपरेटरों और डाटा एंट्री ऑपरेटरों से संबंधित विभिन्न न्यायिक निर्णयों का भी उल्लेख किया है। इनमें विभा लाल, भास्कर नंदन प्रेमचंद विनोद बेटे नरेंद्र कुमार और बिपता उरांव से संबंधित मामलों के साथ-साथ समान कार्य एवं पारिश्रमिक के सिद्धांत पर सर्वोच्च न्यायालय के स्टेट ऑफ़ पंजाब बनाम जगजीत सिंह निर्णय का संदर्भ दिया गया है। संघ ने मांग की है कि इन कानूनी प्रावधानों और निर्णयों के आलोक में कर्मियों की वास्तविक कार्य-प्रकृति, कौशल, योग्यता, अनुभव और जिम्मेदारियों का तुलनात्मक मूल्यांकन किया जाए।

संघ ने विशेष रूप से मांग की है कि कंप्यूटर ऑपरेटरों को 'हाईली स्किल्ड' श्रेणी में शामिल कर लागू अधिसूचना के अनुसार न्यूनतम मजदूरी दी जाए। साथ ही, निगम के पेरोल पर कार्यरत और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से नियोजित कंप्यूटर ऑपरेटरों के पदनाम, योग्यता, कार्यावधि, कार्यस्थल, जिम्मेदारियों और कार्य निष्पादन का तुलनात्मक आकलन कर वेतन में व्याप्त अनुचित अंतर को दूर किया जाए। पात्रता एवं लागू नियमों के अनुसार लाभ की प्रभावी तिथि और पूर्व अवधि के वेतनांतर पर भी निर्णय लेने की मांग की गई है।

श्री राय ने कहा कि कर्मचारी निगम की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी तकनीकी दक्षता और जिम्मेदारियों का उचित मूल्यांकन करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। वर्षों तक कर्मचारियों की जायज मांगों को लंबित रखना या उन्हें उनकी वास्तविक कार्य-क्षमता के अनुरूप पारिश्रमिक से वंचित रखना उचित नहीं है। प्रबंधन को इस मामले में टालमटोल करने के बजाय स्पष्ट और जवाबदेह रुख अपनाना चाहिए।

संघ ने सीएमडी से मांग की है कि इस मामले में सक्षम प्राधिकारी द्वारा तथ्यों, लागू नियमों और न्यायिक निर्णयों के आधार पर स्पष्ट, कारणयुक्त एवं समयबद्ध आदेश जारी किया जाए। साथ ही, संघ के प्रतिनिधियों के साथ शीघ्र बैठक आयोजित कर सभी संबंधित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाए और लिए गए निर्णय तथा उसके क्रियान्वयन की स्थिति से संघ को लिखित रूप में अवगत कराया जाए।

श्री राय ने कहा कि झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ कर्मचारियों के सम्मान, उचित पारिश्रमिक और न्यायसंगत अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है। कर्मचारियों के श्रम, कौशल और जिम्मेदारी का उचित मूल्यांकन सुनिश्चित होना चाहिए। अब निगम प्रबंधन को इस गंभीर विषय पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए और मांगों के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित