दरभंगा , अक्टूबर 10 -- रिष्ठ राजनीतिक चिंतक एवं बी आर ए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के पूर्व राजनीति शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार ओझा ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचार आज भी सामाजिक एवं राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में प्रासंगिक हैं। शनिवार को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित 'आज के संदर्भ में जेपी का स्मरण' विषयक व्याख्यान कोसंबोधित करते हुए मुख्य वक्ता प्रो. ओझा ने जेपी के जीवन, विचारधारा और राजनीतिक यात्रा की चर्चा करते हुए बताया कि अमेरिका में उच्च शिक्षा के दौरान वे मार्क्स, लेनिन और ट्रॉट्स्की के विचारों से प्रभावित हुए। भारत लौटने के बाद वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हुए और 1934 में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान हजारीबाग केंद्रीय कारा से साथियों के साथ जेपी के निकलने तथा आजाद दस्ता के गठन को स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण घटना बताया।उन्होंने कहा कि समाजवादी विचारधारा से आगे बढ़ते हुए जेपी गांधीवादी सर्वोदय और विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से भी प्रभावित हुए। उनके पास कोई राजकीय सत्ता नहीं थी, लेकिन उनकी नैतिक शक्ति असाधारण थी। उन्होंने सत्ता के बजाय समाज के कल्याण और मानव मात्र की मुक्ति को प्राथमिकता दी। वर्ष 1974 के आंदोलन और आपातकाल के विरोध में उनकी भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जेपी के विचारों की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।

कार्यक्रम में विषय प्रवेश कराते हुए पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने कहा कि वास्तविक क्रांति वही है, जो समाज में परिवर्तन लाए। उन्होंने जेपी के दार्शनिक चिंतन की गतिशीलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके विचारों के केंद्र में गरीब, शोषित और वंचित वर्ग हमेशा रहे।

सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. ध्रुव कुमार मित्र ने जेपी आंदोलन से जुड़े अपने संस्मरण साझा किए तथा 1975 के आपातकाल के विरोध में चले जनांदोलन के सामाजिक एवं राजनीतिक प्रभावों की चर्चा की।

अध्यक्षीय संबोधन में राजनीति शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि मार्क्सवाद से गांधीवादी चिंतन और सर्वोदय तक की अपनी वैचारिक यात्रा में जेपी ने नैतिकता को सर्वोपरि रखा। उन्होंने जेपी के अमेरिका प्रवास के दौरान लिखे गए शोधपत्र 'कल्चरल वैरिएशन' का भी उल्लेख किया।

कार्यक्रम की शुरुआत जेपी के चित्र पर पुष्पांजलि, दीप प्रज्वलन और स्वागत गीत से हुई। स्वागत भाषण डॉ. मनोज कुमार ने दिया, जबकि मंच संचालन शोधार्थी नितेश नायक ने किया। इस अवसर पर भाषण, निबंध और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं के सफल प्रतिभागियों को पुस्तकें एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रघुवीर रंजन ने किया।

कार्यक्रम में प्रभात दास फाउंडेशन के मुकेश कुमार सहित विभागीय शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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