रांची , अगस्त 04 -- झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में रांची में जारी छात्रों का आंदोलन अब नए मोड़ पर पहुंच गया है।
आंदोलन लगातार मजबूत हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या यह आंदोलन पूरी तरह छात्रों के हितों पर केंद्रित है या फिर धीरे-धीरे राजनीतिक रंग ले रहा है।
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी धरना और सत्याग्रह पर बैठे हैं। आंदोलन की प्रमुख मांगों में जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, सीबीआई जांच, विवादित परीक्षा को रद्द कर पुनः परीक्षा आयोजित करना तथा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।
आंदोलन को लेकर छात्रों के बीच भी दो अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। एक वर्ग का मानना है कि आंदोलन को पूरी तरह गैर-राजनीतिक रखा जाना चाहिए, ताकि इसकी मूल मांगों से ध्यान न भटके और न्याय की लड़ाई प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सके। इन छात्रों का कहना है कि राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी से आंदोलन का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
वहीं दूसरा का कहना है कि किसी भी जनआंदोलन को विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन मिलना स्वाभाविक है। उनका कहना है कि राजनीतिक समर्थन और आंदोलन के राजनीतिकरण में अंतर होता है तथा व्यापक समर्थन मिलने से छात्रों की मांगों को अधिक मजबूती मिल सकती है।
ज्ञातव्य है कि इस आंदोलन की शुरुआत 25 जुलाई को रांची के मोरहाबादी स्थित गांधी पार्क से हुई थी। शुरुआती चरण में जेएलकेएम से जुड़े छात्र नेता देवेंद्र नाथ की भूमिका प्रमुख रही। इसके बाद विभिन्न छात्र संगठनों और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के जुड़ने से आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ता गया।
समय के साथ आंदोलन को कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन भी मिलने लगा। पूर्व शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की ने छात्रों के लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था कराई, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आंदोलन का नेतृत्व नहीं कर रहे हैं। रांची की मेयर रोशनी खलखो ने भी धरना स्थल पहुंचकर छात्रों को नैतिक समर्थन दिया।
इसके अलावा जेएलकेएम सुप्रीमो ओर डुमरी विधायक जयराम महतो, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी तथा भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं-अन्नपूर्णा देवी, हिमंत बिस्वा सरमा, संजय सेठ, निशिकांत दुबे, दीपक प्रकाश और मनीष जायसवाल-ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके के भी आंदोलन के समर्थन में रांची पहुंचने की चर्चा है।
फिलहाल आंदोलन का केंद्र बिंदु परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की मांग है। हालांकि राजनीतिक समर्थन बढ़ने के साथ यह सवाल भी लगातार उठ रहा है कि इससे छात्रों की आवाज और मजबूत होगी या आंदोलन राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाएगा।
आने वाले दिनों में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली संभावित वार्ता तथा आंदोलन की दिशा यह तय करेगी कि जेपीएससी को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन छात्र हितों तक सीमित रहता है या झारखंड की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन जाता है।
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