नयी दिल्ली , मार्च 27 -- सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि लोगों को सस्ते में दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए जेनरिक दवाईयों को बढ़ावा दे रही है और पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर के लिए नियम है कि वह जेनरिक दवाईयों को लिखें।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अनुप्रिया पटेल ने शून्यकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि भारत को दुनिया का फार्मेसी कहा जाता है और हम जेनरिक दवाइयों के दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक और निर्यातक भी है। दुनिया के तमाम देशों को हम लगभग 20 प्रतिशत जेनरिक दवाईयां उपलब्घ करा रहे हैं। हमारे देश में भी जेनरिक दवाओं का उपयोग बढ सके ताकि आम जनता की जेब से पैसे खर्च हो इसके लिए जेनरिक दवाई के उपयोग को बढ़ावा दे रहे है। सरकारी डाक्टरों को जेनरिक दवाओं को लिखने और इसे प्रोत्साहित करने के लिए कहा गया है।

उन्होंने कहा कि हमारे यहां जो भी दवाईयों बनायी जाती है गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। दवाओं की नियमित गुणवत्ता की जांच की जाती है। भारत के अंदर जितनी भी दवाई दी जाती है सभी की गुणवत्ता और सेफ्टी का पूर्णतः पालन किया जा रहा है।

श्रीमती पटेल ने कहा कि भारत सरकार की ओर से सभी पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिसनर के लिए यह नियम है कि वह जेनरिक दवाईयों को ही लिखें। इस संबंध में राज्य सरकार से भी बात करते हैं और केंद्र सरकार के अस्पतालों में हमारा मंत्रालय डांक्टर के प्रिस्क्रिप्शन (पर्ची) को आडिट करता है। अगर किसी प्रकार की कोई उल्लंघन की शिकायत आती है तो हम उसमें कार्रवाई भी करते हैं। इसी प्रकार राज्य सरकार भी ऑडिट का काम करती है और इसमें हम राज्य सरकार को मदद भी करते हैं। सरकार ज्यादा से ज्यादा जेनरिक दवाईयों को बढावा देने के लिए प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि हमारे देश में 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्र है जिसमें 50 से 90 प्रतिशत कम कीमत पर दवाईयां उपलब्ध है।

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