अमृतसर , जून 06 -- श्री दरबार साहिब पर जून 1984 में हुई सैन्य कार्रवाई की घटनाओं की स्मृति में आयोजित वार्षिक समागम के अवसर पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने शनिवार को कहा कि जून 1984 की पीड़ा सिख समुदाय के मन में आज भी गहराई से मौजूद है और इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
समागम को संबोधित करते हुए श्री धामी ने कहा कि आज से 42 वर्ष पूर्व श्री गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस के अवसर पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सिख धर्मस्थलों पर सैन्य कार्रवाई करवाई थी। उन्होंने कहा कि उस दौरान अनेक सिखों ने अपने प्राणों की आहुति दी और बड़ी संख्या में निर्दोष श्रद्धालु, महिलाएं तथा बुजुर्ग भी प्रभावित हुए।
श्री धामी ने कहा कि जून का महीना आते ही सिख समुदाय की भावनाएं उस दौर की घटनाओं और पीड़ा से जुड़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना स्वतंत्र भारत के इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे लेकर आज भी लोगों के मन में गहरी संवेदनाएं हैं।
एसजीपीसी अध्यक्ष ने कहा कि उन घटनाओं के बाद विभिन्न मामलों में गिरफ्तार किये गये कई सिख लंबे समय से जेलों में बंद हैं। उन्होंने कहा कि सरकारों को इस मुद्दे के मानवीय पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने बलवंत सिंह राजोआणा के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके मामले में लंबित निर्णय पर सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से भी उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने जगतार सिंह हवारा, परमजीत सिंह भिओरा, जगतार सिंह तारा, बलवंत सिंह खेड़ा, प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर सहित अन्य बंदी सिखों की रिहाई की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जेलों में बंद कैदियों के मामलों पर संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुसार विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सिख समुदाय से अपने धार्मिक, सामाजिक और सामुदायिक मुद्दों के समाधान के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पंथक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी शिरकत कर जून 1984 की घटनाओं में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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