जशपुर , सितंबर 25 -- छत्तीसगढ़ के शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों ने जून 2026 से पेंशन का भुगतान नहीं होने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर लंबित पेंशन का भुगतान कराने के साथ पेंशन एवं ग्रेच्युटी व्यवस्था पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि महीनों से पेंशन नहीं मिलने के कारण 65 से 90 वर्ष तक की आयु के कई पेंशनधारकों को दवा, उपचार और रोजमर्रा के खर्चों के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पेंशनधारकों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के कई दशक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सेवा देते हुए बिताए हैं। इनमें ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के महाविद्यालयों में सेवाएं देने वाले प्राध्यापक और कर्मचारी भी शामिल हैं। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन उनके जीवन-यापन और सामाजिक सुरक्षा का प्रमुख आधार है।
उन्होंने बताया कि करीब चार दशक से चली आ रही व्यवस्था के तहत उन्हें पेंशन मिलती रही है। ज्ञापन में 26 अक्टूबर 2010 के शासन निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पांचवें वेतनमान के आधार पर पेंशन तथा चौथे वेतनमान के आधार पर ग्रेच्युटी की व्यवस्था लागू की गई थी। इसके साथ ही कर्मचारियों के वेतन से शासन द्वारा निर्धारित 8.33 प्रतिशत सीपीएफ राशि काटकर विभाग में जमा की जाती रही है।
पेंशनधारकों ने उच्च शिक्षा विभाग के एक सितंबर 2026 के आदेश क्रमांक ईएसटीबी/18649/2026/38-2 का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार आदेश में शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के पेंशनरों को सेवानिवृत्ति के समय लागू वेतनमान के अनुरूप पेंशन एवं उपादान दिए जाने से संबंधित प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद के निर्णय का उल्लेख है।
उन्होंने कहा कि आदेश में विभागीय प्रस्ताव को अमान्य किए जाने और उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में लंबित प्रकरणों में उचित विधिक पैरवी किए जाने का भी उल्लेख है। इस न्यायालयीन प्रक्रिया के बीच जून 2026 से पेंशन का भुगतान नहीं होने से सेवानिवृत्त कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है।
पेंशनधारकों ने मुख्यमंत्री से उच्चतम न्यायालय में लंबित प्रकरणों का अंतिम निर्णय आने तक पूर्व से चली आ रही पेंशन एवं ग्रेच्युटी व्यवस्था जारी रखने तथा जून 2026 से लंबित पेंशन का भुगतान कराने की मांग की है।
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