जयपुर , अक्टूबर 28 -- राजस्थान में माइक्रो बिजनेस उद्यमियों (एमबीई) का क्रेडिट मार्केट गत जून तक करीब 2.01 लाख करोड़ रुपये के बकाया कर्ज तक पहुंच गया है।
इसमें कारोबार के लिए व्यक्तिगत तौर पर लिए गए कर्ज ने माइक्रो बिजनेस को दिए गए कर्ज से ज्यादा रफ्तार पकड़ी है। पिछले तीन साल में व्यक्तिगत उद्यमियों का बकाया कर्ज 20 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ा जबकि माइक्रो बिजनेस के मामले में यह दर 13 प्रतिशत रही। इससे पता चलता है कि कारोबारी गतिविधियों की फाइनेंसिंग में व्यक्तिगत कर्ज की भूमिका बढ़ रही है।
देश की पहली और प्रमुख क्रेडिट इंफोर्मेशन कंपनी ट्रांसयूनियन सिबिल के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर एजाज नजीर ने बुधवार को यहां बताया कि इस बढ़ोतरी के साथ एंटरप्राइज स्तर के कर्ज में एक बड़ी संभावना की ओर भी ध्यान जा रहा है। गत मार्च तक राजस्थान के करीब 31.2 लाख व्यक्तिगत उद्यमियों ने कभी एंटरप्राइज के तौर पर कर्ज नहीं लिया था, जबकि इनमें से 65 प्रतिशत का सिबिल स्कोर 730 से ऊपर था। ये नतीजे ट्रांसयूनियन सिबिल और नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएसआईसी) की संयुक्त स्टडी भारत के माइक्रो बिजनेस उद्यमी विकास, बदलाव और उभरते मौके से सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि देश भर में गत जून तक एमबीई पर 29.6 लाख करोड़ रुपये का कमर्शियल कर्ज बकाया था, जो कुल कमर्शियल क्रेडिट पोर्टफोलियो का लगभग आधा है। इसमें से 19.1 लाख करोड़ रुपये कारोबार के लिए व्यक्तिगत तौर पर कर्ज लेने वालों पर बकाया थे और 10.5 लाख करोड़ रुपये माइक्रो बिजनेस पर। तीन साल में व्यक्तिगत कर्जदारों का बकाया 21 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ा, जबकि माइक्रो बिजनेस का 12 प्रतिशत से। यानी कारोबार के लिए व्यक्तिगत हैसियत से लिया जा रहा कर्ज एंटरप्राइज स्तर के कर्ज से तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने राजस्थान में उद्यमियों के कर्ज की बढ़त के पीछे व्यापार और कमर्शियल व्हीकल कारोबार की तेजी बताते हुए कहा कि राजस्थान के माइक्रो बिजनेस कर्ज की तस्वीर बताती है कि राज्य के उद्यमशील इकोसिस्टम में व्यापार, मैन्युफैक्चरिंग और ट्रांसपोर्ट से जुड़े कारोबारों की अहम भूमिका है। माइक्रो बिजनेस के बकाया कर्ज में व्यापार की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत है जबकि मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा 20 प्रतिशत है। मैन्युफैक्चरिंग में फूड प्रोसेसिंग से जुड़ा कर्ज पिछले तीन साल में 17 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ा है। लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी (एलएपी) अब भी सबसे बड़ा फाइनेंसिंग प्रोडक्ट है, जिसकी कुल एमबीई बकाया कर्ज में 35 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कमर्शियल व्हीकल लोन का हिस्सा 20 प्रतिशत है। व्यक्तिगत बिजनेस कर्जदारों की फाइनेंसिंग में एनबीएफसी की हिस्सेदारी करीब 39 प्रतिशत है, जिसमें बड़ा हिस्सा कमर्शियल व्हीकल लोन का है। यह राज्य भर में कारोबारी गतिविधियों को सहारा देने में उनकी भूमिका दिखाता है।
भारत के बहुत से एमबीई व्यक्तिगत तौर पर कर्ज लेने का रिकॉर्ड बना चुके हैं, पर अभी तक उन्होंने औपचारिक कारोबारी इकाई के रूप में कर्ज नहीं लिया है। गत मार्च तक देश भर में करीब 3.9 करोड़ व्यक्तिगत बिजनेस कर्जदारों ने कभी एंटरप्राइज के तौर पर कर्ज नहीं लिया था। इनमें से 54 प्रतिशत के पास बिजनेस कर्ज का दो साल या उससे ज्यादा का अनुभव था, जबकि 63 प्रतिशत का सिबिल स्कोर 730 से ऊपर था। यह दिखाता है कि पहले से बनी क्रेडिट प्रोफाइल वाले कर्जदारों का एक बड़ा वर्ग मौजूद है।
राजस्थान में एंटरप्राइज कर्ज तक गहरी पहुंच की संभावना व्यक्तिगत बिजनेस कर्जदारों के मौजूदा आधार पर टिकी है। एंटरप्राइज के तौर पर कभी कर्ज न लेने वाले 31.2 लाख उद्यमियों में से 33 प्रतिशत के पास पहले से दो साल से ज्यादा समय तक बिजनेस कर्ज लेने का अनुभव था।
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