नयी दिल्ली , मार्च 31 -- जी-7 देशों के ऊर्जा और वित्त मंत्रियों तथा केंद्रीय बैंक के गवर्नरों ने एक अहम आभासी बैठक की है जिसका मुख्य उद्देश्य पश्चिमी एशिया के बदलते हालात और ऊर्जा बाजारों पर इसके असर का आकलन करना था।
यह बैठक नौ और 10 मार्च को हुई पिछली चर्चाओं की अगली कड़ी के रूप में आयोजित की गई। इसमें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) जैसी संस्थाओं की रिपोर्टों पर भी विचार किया गया। जी-7 ने 11 मार्च को तेल के बड़े भंडार को जारी करने के फैसले का स्वागत किया है, ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे।
बैठक में केंद्रीय बैंकों ने महंगाई पर काबू पाने और वित्तीय प्रणाली को मजबूत रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और वित्तीय स्थिरता बोर्ड (एफएसबी) को वित्तीय बाजारों की कमजोरियों पर निरंतर नजर रखने के लिए भी कहा गया।
मंत्रियों ने साफ कहा है कि सभी देशों को ईंधन और संबंधित उत्पादों के निर्यात पर बेवजह के प्रतिबंध लगाने से बचना चाहिए। इसके साथ ही इस बात का भी उल्लेख किया गया कि सुरक्षित समुद्री व्यापारिक मार्गों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है तथा इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।
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