, Dec. 18 -- बीजू जनता दल के सुभाशीष खुंटिया ने विधेयक को प्रवर समिति की समीक्षा के लिए भेजे जाने की मांग की। उन्होंने इसमें राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का नाम हटाये जाने पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि यह राजनीतिक एजेंडा के तहत किया जा रहा है। उन्होंने इस योजना के खर्च का 40 प्रतिशत भार राज्याें पर डाले जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे गरीब राज्यों के लिए इस योजना को चलाना मुश्किल हो जाएगा।

उन्होंने इस विधेयक में गारंटीशुदा काम के दिन की संख्या 100 से बढ़ कर 125 किये जाने का स्वागत किया लेकिन कहा कि ओडिशा के कालाहांडी जैसे पिछले जिलों के लिए और अधिक दिन के लिए रोजगार की गारंटी का प्रावधान किया जान चाहिए।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के एस निरंजन रेड्डी ने भी विधेयक को प्रवर समिति को भेजे जाने की मांग की।

अन्ना द्रमुक के एम तंबी दरै ने योजना में महात्मा गांधी का नाम बनाए रखने की मांग करते हुए कहा कि इसका ऐतिहासिक महत्व है। उन्होंने इसमें काम के दिनों की संख्या 125 किये जाने काे एक महत्वपूर्ण सुधार बताया और कहा कि हमारी पार्टी पहले से ही दिनों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रही थी।

मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के विकास रंजन भट्टाचार्य ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि सरकार पंचायतों का अधिकार छीनना चाहती है। इस विधेयक से योजना के लाभार्थियों को अधिकारियों की दया पर निर्भर रहना पड़ेगा । उन्होंने कहा कि बुवाई-कटाई के दौरान इस योजना में कार्यों को स्थगित रखने के प्रावधान से उस दौरान लाभार्थियों को मिलने वाला पारिश्रमिक घट सकता है क्योंकि उनके विकल्प सीमित हो जाएंगे।

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