बेंगलुरु , फरवरी 26 -- कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने गुरुवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह के बयान पूरी तरह से अनुचित हैं और इससे सत्ताधारी दल के राजनीतिक विमर्श को कोई मदद नहीं मिलेगी।

श्री परमेश्वर ने यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने श्री गांधी को निशाना बनाकर टिप्पणी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता का मनोबल गिराने के इरादे से बार-बार ऐसे बयान दिए जाते हैं, लेकिन ऐसे प्रयास राजनीतिक या व्यक्तिगत रूप से सफल नहीं होंगे।

श्री परमेश्वर ने कहा कि राहुल गांधी ने मजबूत राजनीतिक सुझबूझ दिखायी है और प्रतिद्वंद्वी दलों की आलोचनाओं का लगातार सामना किया है। उन्होंने कहा कि श्री गांधी राजनीतिक दबाव और चुनौतीपूर्ण स्थितियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं। उन्होंने जोर दिया कि सार्वजनिक बयानों के माध्यम से उनके मनोबल को कमजोर करने की कोशिशों से ऐसे बयान देने वालों को कोई राजनीतिक लाभ नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं को सार्वजनिक विमर्श में गरिमा बनाए रखनी चाहिए और अनावश्यक व्यक्तिगत टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उन्होंने श्री गोयल के बयान को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि लोकतंत्र व्यक्तियों पर राजनीतिक हमलों के बजाय रचनात्मक बहस से फलता-फूलता है।

गृह मंत्री ने कहा कि श्री राहुल गांधी देश के प्रमुख राजनीतिक व्यक्तियों में से एक हैं और उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख चेहरे के रूप में व्यापक रूप से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि श्री गांधी ने समकालीन राजनीतिक चर्चाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अक्सर खुद को जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले नेता के रूप में स्थापित किया है।

श्री परमेश्वर ने यह भी कहा कि श्री गांधी संसद और सार्वजनिक मंचों पर लोगों की चिंताओं को उठाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसी राजनीतिक स्थिति के कारण विपक्षी नेताओं के लिए आलोचनात्मक प्रतिक्रिया देना स्वाभाविक है, लेकिन आलोचना लोकतांत्रिक और स्वीकार्य सीमाओं के भीतर होनी चाहिए।

भाजपा की राजनीतिक रणनीति के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं पर हमला करने से किसी भी दल की चुनावी संभावनाएँ मजबूत नहीं होंगी। उन्होंने दावा किया कि ऐसी बयानबाजी केवल राजनीतिक टकराव को बढ़ाती है और विकासोन्मुखी राजनीति में योगदान नहीं देती है।

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