रायपुर , अक्टूबर 05 -- छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में महिला स्वसहायता समूहों ने लेमन ग्रास की खेती के जरिए आय बढ़ाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है। पेंड्रा जनपद पंचायत के ग्राम अमारू में 10 महिला स्वसहायता समूहों की महिलाएं करीब 20 एकड़ भूमि पर सामूहिक रूप से लेमन ग्रास की खेती कर रही हैं।
सोमवार को प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार बिहान योजना से जुड़ी ज्योति महिला समूह, महामाया समूह, जय संतोषी माता समूह और हनी समूह सहित अन्य स्वसहायता समूह इस पहल से जुड़े हैं। महिलाओं को खेती के साथ लेमन ग्रास से तेल निकालकर उसे खुले बाजार और औषधीय संस्थानों तक पहुंचाने की तैयारी कराई जा रही है। इससे उत्पादन को सीधे बाजार से जोड़कर समूहों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
लेमन ग्रास से प्राप्त सुगंधित तेल का उपयोग चाय, इत्र और विभिन्न औषधीय उत्पादों में किया जाता है। ज्योति महिला समूह की सदस्य गायत्री काशीपुरी ने बताया कि समूह की 11 महिलाएं पादप औषधि बोर्ड के सहयोग से लेमन ग्रास की खेती कर रही हैं। उत्पादन के बाद इससे तेल निकालकर बाजार एवं औषधीय संस्थानों में बेचा जाएगा। समूह की महिलाएं भविष्य में खेती का दायरा और बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
महामाया समूह की सुशीला भानू, जय संतोषी माता समूह की पाबरिया भानू और हनी समूह की पूजा ध्रुव के अनुसार बिहान योजना से जुड़ने के बाद महिलाओं को आजीविका के नए अवसर मिले हैं। समूहों को 15 हजार रुपये की चक्रीय राशि, 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि और बैंक लिंकेज का लाभ भी दिया गया है।
स्वसहायता समूहों की महिलाएं लेमन ग्रास की खेती के अलावा सेंटरिंग प्लेट व्यवसाय, टेंट हाउस, सब्जी बाड़ी, किराना दुकान, बकरी पालन और मुर्गी पालन जैसी आयमूलक गतिविधियों से भी जुड़ी हैं। इन गतिविधियों के जरिए महिलाओं की व्यक्तिगत आय बढ़ाने और परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 'लखपति दीदी परिकल्पना के तहत ग्रामीण महिलाओं को स्वसहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, बैंक लिंकेज और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं को आयमूलक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
अमारू में शुरू की गई लेमन ग्रास की सामूहिक खेती को उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ने की योजना है। प्रशासन का मानना है कि बाजार की मजबूत व्यवस्था विकसित होने पर यह गतिविधि स्वसहायता समूहों की महिलाओं के लिए नियमित आय का माध्यम बन सकती है और उन्हें 'लखपति दीदी के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में सहायक होगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित