नयी दिल्ली , अक्टूबर 08 -- वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने गुरुवार को हुई बैठक में अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई सुधारों की घोषणा की हालांकि करों की दरों पर कोई चर्चा नहीं हुई।

बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि पिछले साल दरों में किए गए बदलावों के बाद इस बैठक में सुधारों पर जोर दिया गया। उन्होंने बताया कि दरों की समीक्षा के लिए अब साल में एक बार अलग से एक बैठक होगी।

आपूर्ति श्रृंखला में किसी एक की गलती के लिए अभी इसमें शामिल सभी लोगों का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) रिटर्न रोक दिया जाता है। परिषद ने तय किया है कि एक की गलती के लिए सबको सजा देने की बजाय सिर्फ उसके ठीक बाद वाले का रिटर्न रोकने और बाकी सभी को रिटर्न देने की संभावना पर विचार के लिए अधिकारियों की एक समिति का गठन किया जाएगा जो तीन महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी। समिति की सिफारिशों का अध्ययन करने के बाद उसे जीएसटी परिषद में रखा जाएगा और उसके फैसले को अगले साल 01 अप्रैल से लागू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अब जीएसटी के तहत गिरफ्तारी का अधिकार समाप्त कर दिया गया है। कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए न्यूनतम सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दी गई है। साथ ही न्यूनतम सजा का प्रावधान भी समाप्त कर दिया गया है। देरी से रिटर्न फाइल करने के लिए मूल कर राशि की वसूली, ब्याज और जुर्माने से ज्यादा कोई कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।

जीएसटी परिषद की बैठक से इतर केंद्र सरकार के एक महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि अलग-अलग राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) अधिकार क्षेत्र के दायरे में आने के कारण कई करदाताओं को अभी अलग-अलग रिटर्न भरने होते हैं। सीजीएसटी के तहत 69.5 लाख करदाताओं में से दो लाख इस श्रेणी में हैं। उनके लिए एकीकृत विंडो बनाने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा। यह अगले वित्त वर्ष से लागू होगा।

उन्होंने कहा कि रिफंड क्लेम के एक्नोलेजमेंट में लगने वाले समय को 15 दिन से घटाकर अब 10 दिन कर दिया गया है। पंजीकरण की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए लगने वाले दस्तावेजों के बारे में निश्चितता रहेगी। प्रणाली के जरिये ही इकाइयों को दिशा-निर्देश दिए जाएंगे और मदद की जाएगी। छोटे आपूर्तिकर्ताओं के लिए ई-कॉमर्स के जरिये आपूर्ति करने के लिए पंजीकरण सरल किया जाएगा। करदाता पंजीकरण के समय दिए गए विवरण में स्वयं संशोधन कर सकेंगे और पंजीकरण रद्द कराने का आवेदन स्वतः स्वीकार माना जाएगा।

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