चंदौली , फरवरी 13 -- दिल्ली हावड़ा रेलमार्ग पर स्थित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन पर राजकीय रेलवे पुलिस ने गैर सरकारी संस्था एसोसियेशन ऑफ वालंटरी एक्शन (एवीए) की मदद से एक मासूम को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से मुक्त कराने में सफलता हासिल की है।
पुलिस ने बताया कि गुरुवार को रेलवे प्लेटफार्म पर संदिग्ध रुप से घूम रहे एक महिला समेत चार व्यक्तियों की गतिविधियों पर पुलिस को शक हुआ। सख्ती से पूछताछ करने पर उन्होंने कबूल किया कि बच्चे को सुबह लगभग पांच बजे स्टेशन की सीढ़ियों पर सो रहे परिवार के पास से अगवा किया गया था। ट्रेन आने तक उसे झाड़ियों में छिपाए रखा गया और रोने से रोकने के लिए दूध में 'अल्प्रासेन' नामक नशीली दवा मिलाकर पिला दी गई। आरोपियों को ट्रेन रवाना होने से कुछ मिनट पहले ही पकड़ लिया गया।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे एक संगठित ट्रैफिकिंग गिरोह के सदस्य हैं और बच्चों को बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक नर्सिंग होम में बेचते थे, जहां प्रति बच्चा कम से कम 20 हजार रुपये मिलते थे। उन्होंने अब तक आठ बच्चों को बेचने की बात स्वीकार की है। आरोपियों के कब्जे से डायपर, ऊनी टोपी, दूध की बोतल, नए कपड़े, दूध के पैकेट और अल्प्रासेन की दो गोलियां बरामद की गईं। जांच में सामने आया कि यात्रा के दौरान बच्चों को नए कपड़े पहनाकर और नशीली दवा देकर सुलाए रखा जाता था ताकि किसी को संदेह न हो। अल्प्रासेन अवसाद संबंधी दवा है, जिसे बच्चों को देना गंभीर और जानलेवा हो सकता है।
एवीए के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा कि बच्चों की ट्रैफिकिंग एक संगठित और जटिल अपराध है, जिसमें अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय रहते हैं। उन्होंने मुजफ्फरपुर के अस्पतालों की भूमिका की गहन जांच की मांग की और कहा कि जब तक सभी आरोपियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, ऐसे गिरोह सक्रिय रहेंगे।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर बच्चे को उसके माता-पिता से मिलाया, जो बिहार के रोहतास जिले के निवासी हैं। आगे की कार्रवाई के लिए बच्चे को चंदौली जिले की बाल कल्याण समिति को सुपुर्द कर दिया गया है। जीआरपी ने भारतीय न्याय संहिता, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और एनडीपीएस एक्ट 1985 की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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