कोलकाता , अक्टूबर 29 -- गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने गुरुवार को अपने सबसे बड़े वाणिज्यिक जहाज निर्माण निर्यात ऑर्डर के अंतर्गत, जर्मन जहाज कंपनी कार्स्टन रेहडर शिफ्समाक्लर एंड रीडेरेई जीएमबीएच एंड कंपनी केजी के लिए पांचवें बहुउद्देशीय पोत (एमपीवी) की 'कील लेइंग' (नींव रखने की प्रक्रिया) पूरी की। इस कदम से वैश्विक वाणिज्यिक जहाजरानी बाजार में कोलकाता स्थित इस शिपयार्ड की स्थिति और मजबूत हुई है।
'कील लेइंग' उस पहले जहाज की शुरुआत का प्रतीक है, जो जीआरएसई और एक जर्मन कंपनी के बीच हुए तीन अनुबंधों में से दूसरे अनुबंध के तहत आता है। इस अनुबंध में कुल 12 'कोरल 7500 डेडवेट-टन के बहुउद्देशीय पोत का निर्माण शामिल है। समारोह में जीआरएसई, कार्स्टन रेहडर और वर्गीकरण संस्था डीएनवी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बहुउपयोगी वाणिज्यिक कार्गो जहाजों के रूप में डिज़ाइन किये गये एमपीवी, एक ही जहाज में कई तरह का माल ले जा सकते हैं, जिसमें थोक, सामान्य और परियोजना कार्गो शामिल हैं। जीआरएसई के ये जहाज अपने हैच कवर पर कंटेनर और डेक पर कई विंड-टर्बाइन ब्लेड ले जाने में भी सक्षम होंगे, जिससे ये बहुत बड़े और विशेष प्रकार के कार्गो का भी परिवहन कर सकेंगे।
जून 2024 में हस्ताक्षरित पहले अनुबंध में चार जहाज शामिल थे, जबकि अक्टूबर 2024 में हस्ताक्षरित दूसरे अनुबंध में चार और जहाज शामिल हैं। पांचवां जहाज, दूसरे अनुबंध के तहत बनने वाला पहला जहाज है। सितंबर 2025 में हस्ताक्षरित तीसरे अनुबंध में चार हाइब्रिड-प्रोपल्शन एमपीवी शामिल हैं जिससे कुल ऑर्डर 12 जहाजों का हो गया है। प्रत्येक पोत की लंबाई 120 मीटर, चौड़ाई 17 मीटर और जल में डूबने की गहराई 5.85 मीटर होगी। इनकी अधिकतम कुल क्षमता 7,500 टन होगी। इन पोतों में बड़े मालवाहक कक्ष होंगे, जिन्हें विभिन्न प्रकार के वाणिज्यिक माल और परियोजनाओं से संबंधित भारी या विशेष माल की ढुलाई के लिए तैयार किया गया है।
इन बहुउद्देशीय पोतों का विकास एफ. एच. बर्टलिंग, फॉरेस्टवेव नेविगेशन/शुल्टे एंड ब्रुन्स और डेल्फ्ट शिपिंग सहित जर्मनी की समुद्री क्षेत्र की कंपनियों के सहयोग से किया जा रहा है। तकनीकी डिजाइन में जीआरएसई के साथ एसईडीएस सहयोग प्रदान कर रहा है, जबकि डीएनवी इन पोतों का वर्गीकरण और प्रमाणन करेगी।
जीआरएसई की स्थापना वर्ष 1884 में हुआ। इसने अब तक 800 से अधिक प्लेटफॉर्म का निर्माण किया है, जिनमें भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और मित्र देशों के लिए बनाये गये 118 युद्धपोत शामिल हैं। इसने मॉरीशस, सेशेल्स और गुयाना के लिए भी पोतों का निर्माण किया है।
जीआरएसई की कोलकाता में सात और रांची में एक परिचालन इकाई है। यह एक साथ 28 जहाजों का निर्माण कर सकता है। जहाज निर्माण और जहाजों की मरम्मत के अलावा, इसने इंजीनियरिंग उत्पादों के क्षेत्र में भी अपने कार्यों का विस्तार किया है। इनमें पूर्वनिर्मित इस्पात पुल, डेक मशीनरी और समुद्री डीजल इंजनों से संबंधित सेवाएं शामिल हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित