तेहरान , फरवरी 15 -- ईरान और अमेरिका मंगलवार को जिनेवा में अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के दूसरे दौर में प्रवेश करेंगे। एक वरिष्ठ ईरानी राजनयिक ने मीडिया को यह जानकारी दी।
ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त रवांची ने तेहरान में बीबीसी को दिए साक्षात्कार में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि किसी समझौते तक पहुंचने के लिए अमेरिका को अपनी गंभीरता साबित करनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ईमानदारी दिखाता है, तो दोनों पक्षों के बीच पुनः शुरू हुई अप्रत्यक्ष वार्ताएं किसी समझौते तक पहुंच सकती हैं।
उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच वार्ता का पहला दौर छह फरवरी को ओमान की राजधानी मस्कट में हुआ था। श्री रवांची ने कहा कि ईरान की ओर से 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम को काफी हद तक निष्क्रिय (डायल्यूट) करने की पेशकश इस बात का प्रमाण है कि देश समझौता करना चाहता है। उन्होंने कहा, "यदि वे प्रतिबंधों पर बात करने को तैयार हैं, तो हम इस मुद्दे और अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अन्य विषयों पर चर्चा के लिए तैयार हैं।"उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम गैर-परक्राम्य है और देश अपनी रक्षात्मक क्षमताओं से समझौता स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा, "हमारी समझ यह है कि वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि यदि समझौता करना है, तो ध्यान परमाणु मुद्दे पर ही केंद्रित होना चाहिए।"श्री रवांची ने ईरान की धरती पर यूरेनियम संवर्धन शून्य करने के सवाल को खारिज करते हुए कहा कि ईरान के लिए यह विषय अब एजेंडे में नहीं है।
उन्होंने पश्चिम एशिया क्षेत्र में अमेरिका के सैन्य जमावड़े की आलोचना करते हुए चेतावनी दी कि एक और युद्ध "सभी के लिए त्रासदीपूर्ण होगा" और विशेष रूप से आक्रमण शुरू करने वालों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। श्री रवांची ने कहा कि अगर ईरान के अस्तित्व को कोई खतरा पैदा होता है, तो देश उसी के अनुरूप जवाब देगा और ईरान के खिलाफ युद्ध के क्षेत्रीय परिणाम होंगे।
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