नयी दिल्ली , सितंबर 09 -- केन्द्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वदेशी समुद्री अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए भारत के उन्नत महासागरीय अनुसंधान पोत 'ओआरवी सागर मंथन' को लॉन्च किया।

पश्चिम बंगाल के कोलकाता के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में भारत के अत्याधुनिक महासागर अनुसंधान पोत ओआरवी सागर मंथन (यार्ड 3041) का शुभारंभ किया गया। यह पोत गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) के लिए डिजाइन और निर्मित किया है।

केन्द्रीय मंत्री और उनकी पत्नी मंजू सिंह ने वर्चुअल माध्यम से इसका शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और अनुबंध हस्ताक्षर के दो साल तथा कील बिछाने के महज पांच महीने के भीतर प्रक्षेपण पूरा करने के लिए टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पोत जीआरएसई द्वारा निर्मित भारत का पहला उन्नत महासागरीय अनुसंधान पोत है और महासागरों से जुड़ा डेटा भारत को आपदा निवारण, पर्यावरणीय सुधार और वैश्विक महासागरीय भू-राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने बताया कि यह पोत धीरे-धीरे 43 साल पुराने ओआरवी सागर कन्या की जगह लेगा।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने बताया कि लगभग 840 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह पोत भारत सरकार के दीप महासागर मिशन के वर्टिकल-4 के तहत बनाया गया एक सर्व-मौसम अनुकूल, बहुविषयक मंच है, जिसकी सेवा अवधि 30 वर्ष अनुमानित है और जो दक्षिणी महासागर जैसे चरम वातावरण में काम कर सकेगा। इसमें डायनामिक पोजिशनिंग, मल्टीबीम बाथिमेट्री, मल्टीचैनल भूकंपीय प्रणाली, सब-बॉटम प्रोफाइलिंग और आरओवी-एयूवी तैनाती जैसी सुविधाएं हैं। यह हिंद महासागर के मध्य-महासागरीय कटक क्षेत्र में हाइड्रोथर्मल सल्फाइड खनिजकरण की पहचान सहित बहु-विषयक अनुसंधान में उपयोग होगा। पोत को इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग और अमेरिकन ब्यूरो ऑफ शिपिंग से दोहरी श्रेणी प्रमाणन प्राप्त है।

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