नयी दिल्ली , अगस्त 3 -- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को यहां स्टार्टअप्स और निवेशकों के साथ एक संयुक्त राउंड टेबल बैठक को संबोधित किया और इस अवसर पर उन्होंने 'बायो-निवेश' का शुभारंभ किया ।

डॉ सिंह ने अपने संबोधन में जैव प्रौद्योगिकी आधारित विकास के लिए नवोन्मेषकों, निवेशकों, उद्योग और सरकार के बीच बेहतर और अधिक निकट समन्वय का आह्वान किया।

मंत्रालय की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह एक रणनीतिक मंच है, जिसका उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकी के नवोन्मेषकों और निवेश समुदाय के बीच जुड़ाव को मजबूत करना तथा विस्तार और व्यावसायीकरण की संभावनाओं वाली जैव प्रौद्योगिकी संबंधी नवाचारों में निजी पूंजी के प्रवाह को बढ़ावा देना है। मंत्री ने कहा कि निवेश के बिना नवाचार अधूरा है, जबकि नवाचार के बिना निवेश लंबे समय तक टिका नहीं रह सकता।

उन्होंने इसी संदर्भ में देश में जैव प्रौद्योगिकी आधारित विकास के लिए नवोन्मेषकों, निवेशकों, उद्योग और सरकार के बीच बेहतर और अधिक निकट समन्वय की आवश्यक पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बायो-निवेश "उन आशाजनक विचारों को अनुसंधान और उद्यमिता से उद्यम के विकास , बड़े स्तर और बाजार तक पहुँचाने के लिए आवश्यक सेतु का निर्माण करने में मदद करेगा।"इस मंच के तहत आयोजित स्टार्टअप्स-निवेशक गोलमेज चर्चा के दौरान डॉ. सिंह ने सुझाव दिया कि जैव प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में "पाँच वर्षों में पाँच बड़ी कंपनियाँ" जैसी पहल की व्यवहार्यता पर विचार किया जा सकता है।

बायो-निवेश के उद्घाटन संस्करण में 20 उच्च क्षमता वाले जैव प्रौद्योगिकी और डीप-टेक क्षेत्र के स्टार्टअप्स और लगभग 50 चयनित निवेशकों को बलाया गया था। इस मंच को स्टार्टअप के लिए अपने को दिखाने के परंपरिक मंच या निवेशक-संपर्क कार्यक्रम तक सीमित रखने की बजाय दोतरफा संवाद के माध्यम के रूप में खड़ा किया गया है। इसके माध्यम से नवोन्मेषक निवेशकों के दृष्टिकोण को समझ सकेंगे, जबकि निवेशकों को जैव प्रौद्योगिकी से जुड़ी वैज्ञानिक, नियामक और विकास संबंधी प्रक्रियाओं की गहरी समझ प्राप्त होगी।

कार्यक्रम में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव ,जैव अनुसंधान एवं नवाचार परिषद (बीआरआईसी) के महानिदेशक एवं जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) के अध्यक्ष डॉ. राजेश एस. गोखले, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार एवं बीआरआईसी के प्रबंध निदेशक डॉ. धनंजय तिवारी, एस्सेल इंडिया के संस्थापक साझेदार प्रशांत प्रकाश, कई निवेशक फार्मों और स्टार्टअप समुदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

डॉ. सिंह ने कहा कि बायो निवेश की सफलता का आकलन केवल स्टार्टअप की प्रस्तुतियों या बैठकों में भागीदारों की संख्या से नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इससे बनने वाली साझेदारियों, जुटाए गए निवेश, बड़े पैमाने पर विकसित की गई तकनीकों और बाजार में लाए गए उत्पादों के आधार पर किया जाना चाहिए।

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