लखनऊ/अयोध्या , सितंबर 15 -- श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन को लेकर सामने आई कथित गलत जानकारी पर सफाई दी है। न्यास ने कहा है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद के चयन की प्रक्रिया तय मानकों और पारदर्शिता के साथ पूरी की गई थी।
न्यास ने विशेष रूप से उस दावे को गलत बताया है, जिसमें कहा गया था कि एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (सेवानिवृत्त) 11-12 अगस्त 2026 को अयोध्या में हुए साक्षात्कार में शामिल नहीं हुए थे।
न्यास की ओर से 14 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी के चयन के लिए 6 जुलाई 2026 को खोज समिति का गठन किया गया था।
समिति को कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। दिल्ली एनसीआर, पुणे और संभलपुर में एआई स्क्रीनिंग तथा मेनुअल विशेषज्ञता के माध्यम से आवेदनों का बहु-स्तरीय मूल्यांकन किया गया।
इसके बाद 16 अभ्यर्थियों को अंतिम सूची में शामिल किया गया। इन अभ्यर्थियों ने 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में आमने-सामने की बातचीत में हिस्सा लिया। न्यास के अनुसार, एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने भी 11 अगस्त को पहली पाली में साक्षात्कार प्रक्रिया में भाग लिया था।
खोज समिति ने 1 सितंबर को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें न्यास को सौंप दीं। इसके बाद 2 सितंबर को न्यास की ओर से शीर्ष तीन अनुशंसित अभ्यर्थियों के नाम सार्वजनिक किए गए।
इनमें एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (सेवानिवृत्त), संजय प्रताप सिंह विश्वास राव और सुश्री श्रुति भारद्वाज शामिल थे।
न्यास ने कहा कि जितेंद्र मिश्रा के साक्षात्कार में शामिल नहीं होने का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। शीर्ष तीन अनुशंसित अभ्यर्थियों में उनका शामिल होना ही उनकी भागीदारी, मूल्यांकन और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया का दस्तावेजी प्रमाण है।
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